“मंदिर के आसपास प्रसाद बेचते हुए कोई विधर्मी मिले तो उसकी ठुकाई करो”, पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने दिया विवादित बयान
भोपाल: भोपाल की पूर्व बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने एक बार फिर गैर हिंदुओं को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा, “विधर्मियों के हाथ की बनी कोई चीज नहीं खाना है। मंदिर के आसपास ऐसे लोग मिलें तो ठुकाई करो। न उनको बेचने देंगे, न आने देंगे।”
उन्होंने कहा, “अपने घर में किसी भी विधर्मी को न आने दें, चाहें वो लाइट फिटिंग, नल फिटिंग या सफाई वाला क्यों न हो। विधर्मियों को सबक सिखाने के लिए घर में हथियार रखो।” इसके अलावा साध्वी ने महात्मा गांधी और पंडित जवाहर लाल नेहरू को लेकर भी तंज कसा।
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने और क्या कहा?
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने रविवार को भोपाल के छोला इलाके में दुर्गा वाहिनी पथ संचालन कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने कहा, “मंदिरों में नवरात्रि में ऐसे कई ग्रुप बनाकर खोजना पड़ेगा कि हमारे मंदिरों के आसपास प्रसाद कौन बेचता है? अगर प्रसाद बेचते हुए कोई विधर्मी का पता चले तो जितनी हो सके उसकी ठुकाई करो। विधर्मियों से हम प्रसाद नहीं खरीदेंगे। न उनको बेचने देंगे और ना ही मंदिर में आने देंगे।”
दुश्मन घर की दहलीज पार करे तो बीच से काट दो: साध्वी
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने ये भी कहा कि दुश्मन घर की दहलीज पार करे तो बीच से काट दो। घर में हथियार रखो। मैंने ये कहा है कि आपको अपने घरों में हथियार रखना चाहिए। हथियारों को जरा धार तेज करके रखना चाहिए। क्योंकि, जब हमारी बेटियों-बहनों को घरों में से उठाकर उनके टुकड़े करके रोड पर बिखेर दिए जाते हैं तो हमारे अंदर बहुत पीड़ा होती है।
उन्होंने कहा कि इस पीड़ा को बाहर निकालने के लिए जब दुश्मन हमारे घर की दहलीज पार करने का प्रयास करे तो उनको बीच में से काट देना चाहिए। दुर्गा वाहिनी का यह काम है कि हर घर में दुर्गा तैयार करो। हर घर में हथियार रखने के लिए आह्वान करो। हर घर में नियम-कानून का हम पालन करते हैं, क्योंकि ये देश हमारा है।
गांधी और नेहरू पर कसा तंज
साध्वी ने महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर भी तंस कसा। उन्होंने कहा, “वो कहते थे कि आजादी बिना खड़क, बिना ढाल के मिली, वो सिर्फ सत्ता के लालची थे। उन्होने ऐसे व्यक्ति को प्रथम प्रधानमंत्री बना दिया जो न तो वोटों में जीता था, न देश के मन को जीता था। न उसने देश के लिए किसी प्रकार से कोई सेवा की, ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाया जो पेरिस में अपने कपड़े धुलवाने के लिए भेजता था। अंग्रेजों की चाटुकारिता करता था। अंग्रेजी महिलाओं के समक्ष नतमस्तक होता था। न चरित्र से अच्छा, न चाल से अच्छा और न नेतृत्व अच्छा, ऐसे लोगों को प्रधानमंत्री बनाकर देश से कुठाराघात किया। स्वतंत्रता के बाद उन्हीं नीतियों के कारण हम उस कगार पर पहुंचे, जहां हमारे देश के कई देश बना दिए गए।”
