
जातियों में बंटने के बजाय एकजुट हों हिन्दू, संघ अनुशासन और राष्ट्रियता का पर्याय: कालेन्द्रानंद
- सहारनपुर में आयोजित हिंदू सम्मेलन को सम्बोधित करता वक्ता।
सहारनपुर। स्वामी कालेंद्रानंद महाराज ने कहा कि हिंदू समाज को एकजुट होने की आवश्यकता है। हमें जाटियों में नहीं बंटना चाहिए। स्वामी कालेंद्रानंद महाराज आज उत्तम विहार स्थित शाकुंभरी नगर में आयोजित हिन्दू सम्मेलन को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में वर्ण व्यवस्था का उल्लेख है, न कि जाति व्यवस्था का। उन्होंने हिन्दू पहचान पर जोर देते हुए कहा कि सभी हिन्दुओं के सिर पर चोटी, हाथ में कलावा और माथे पर तिलक होना आवश्यक है। हिन्दुत्व की व्याख्या करते हुए स्वामी जी ने कहा कि हिन्दुत्व ही स्वधर्म है, जो हिमालय के समान स्थिर है। हिन्द का अर्थ है चंद्रमा के समान सबको अमृत बांटना। वहीं संघ का अर्थ अनुशासन, सेवा, समर्पण, राष्ट्रीयता और हिन्दुत्व है। संघ आज समाज में विभिन्न प्रकार से सेवा के कार्य कर रहा है, जिस पर हिन्दू समाज को गर्व होना चाहिए।
मुख्य वक्ता, विभाग बौद्धिक प्रमुख सुभाष सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष पूर्ण होने पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सौ वर्षों के इतिहास में संघ ने बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं। हजारों स्वयंसेवकों व प्रचारकों ने संघ को अपने रक्त से सींचा है। श्री सिंह ने याद दिलाया कि चाहे चीन का युद्ध हो या पाकिस्तान का, संघ के कार्यकर्ताओं ने हमेशा राष्ट्रहित में सहयोग दिया है।
इस अवसर पर विभाग शारीरिक शिक्षण प्रमुख संदीप खुराना, वीर सिंह चैहान, राजेश चैहान, अमित भाटिया, पंकज सेठी, आदित्य, आदेश चैहान, अमरीश चैहान, दिलीप पुंडीर और अमर सिंह सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजेश काम्बोज एवं संचालन विभाग सेवा प्रमुख योगेन्द्र शर्मा ने किया।
