जेएनयू छात्र संघ चुनाव परिणामों पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, जानें वजह

 

हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जेएनयू छात्रसंघ के नतीजों की घोषणा पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह रोक लगाई है। इनमें काउंसलर के पद 55 से घटाकर 46 करने को चुनौती दी गई थी। जेएनयू छात्रसंघ का चुनाव शुक्रवार को हो गया। न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने अंशुमन दुबे और अनुज कुमार दुबे की याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 17 सितंबर की तारीख तय की है।

जेएनयू प्रशासन ने कोर्ट में ही नोटिस स्वीकार कर लिया। इस याचिका में चुनाव समिति को पार्टी बनाने का निर्देश दिया गया है। पेश याचिकाओं में कहा गया है कि छात्रसंघ चुनाव समिति ने चुनाव से पहले काउंसलर के पद 55 से घटाकर 46 कर दिए। इसके लिए विश्वविद्यालय की पूर्व अनुमति भी नहीं ली गई थी। यह लिंगदोह समिति की सिफारिशों का सीधा उल्लंघन है। इसके मुताबिक, हर संकाय और स्कूल का प्रतिनिधित्व छात्रसंघ में होना चाहिए। इसके मुताबिक ही काउंसलर की संख्या 55 तय की गई थी। यह छात्रसंघ के संविधान का हिस्सा था।

जेएनयू की ओर से स्थायी अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने कहा कि छात्रसंघ के संविधान में बदलाव या काउंसलर की संख्या घटाने पर चुनाव समिति निर्णय नहीं ले सकती थी। समिति का निर्णय लिंगदोह समिति की सिफारिशों के विरुद्घ था। इस बाबत चुनाव समिति को बार-बार निर्देश दिया गया था, लेकिन समिति ने कोई ध्यान नहीं दिया।

याची के वकील ने यह भी कहा कि मामूली गलती पर राघवेंद्र मिश्रा नामक छात्र का नामांकन रद्द कर दिया गया था। इसके बाद उसने दोबारा फार्म भरा, लेकिन उसे भी रद्द कर दिया गया। इस मुद्दे को मिश्रा ने शिकायत कमेटी के सामने उठाया था। शिकायत कमेटी की सिफारिश को भी मानने से चुनाव समिति ने इनकार कर दिया था। यह नामांकन रद्द करने का चुनाव समिति ने कोई कारण भी नहीं बताया। मिश्रा ने जब इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी, तब उसे चुनाव लड़ने की अनुमति मिल सकी थी।

 
 

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