राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता के खिलाफ याचिका पर सुनवाई जारी, अगली तारीख नौ मार्च
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दोहरी नागरिकता आरोप में एफआईआर दर्ज करने की याचिका खारिज करने वाले एमपी-एमएलए कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। यह याचिका कर्नाटक के एस विग्नेश शिशिर ने दाखिल की है। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए नौ मार्च की तारीख तय की है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रायबरेली की अदालत के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विरुद्ध कथित दोहरी नागरिकता विवाद के संबंध में एफआईआर दर्ज कराने का आदेश देने से इंकार करने को चुनौती देने वाली एक याचिका पर शुक्रवार को लंबी सुनवाई की।
कर्नाटक के एस विग्नेश शिशिर ने पहले रायबरेली की एमपी-एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, शासकीय गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने की अर्जी दी थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी दो देशों की नागरिकता रखते हैं।
एमपी-एमएलए कोर्ट ने अर्जी को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने अपने में कहा था कि नागरिकता से संबंधित मामलों को लेकर याची ने पहले भी इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में तथ्य प्रस्तुत किए हैं। इसी आदेश को अब हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।
हाई कोर्ट में शुक्रवार को याची की ओर से बहस पूरी कर ली गई। याची ने कोर्ट को बताया कि राहुल गांधी के पास दो देशों की नागरिकता और दो पासपोर्ट हैं और वे स्वयं को ब्रिटेन का नागरिक भी मानते हैं। याची की बहस के बाद, राज्य सरकार ने बहस के लिए कोर्ट से समय मांगा है।
एस विग्नेश शिशिर ने ने 28 जनवरी 2026 को विशेष एमपी / एमएलए कोर्ट के पारित आदेश को चुनौती दी है, जिसमें अदालत ने राहुल गांधी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की उसकी प्रार्थना को अस्वीकार कर दिया था। विशेष कोर्ट ने कहा था कि वह नागरिकता के प्रश्न पर निर्णय लेने के लिए सक्षम नहीं है। याची ने गांधी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच कराने की मांग की है।
उसने कांग्रेस के सांसद पर भारतीय न्याय संहिता, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम तथा पासपोर्ट अधिनियम के अंतर्गत कई आरोप लगाए हैं। शिकायत प्रारंभ में रायबरेली के विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में दायर की गई थी किंतु शिकायतकर्ता विग्नेश की याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 17 दिसंबर 2025 को उक्त आपराधिक वाद को रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित कर दिया था। लखनऊ की विशेष कोर्ट ने 28 जनवरी 2026 को उक्त प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया था, जिसके विरुद्ध याची ने हाई कोर्ट की शरण ली है।
