ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार का आया पहला रिएक्‍शन

ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार का आया पहला रिएक्‍शन

अमेरिका में टैरिफ को लेकर हुए ताजा घटनाक्रम के बाद भारत सरकार सतर्क हो गई है। वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को स्पष्ट किया कि वह अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके बाद राष्ट्रपति प्रशासन द्वारा की गई घोषणाओं के संभावित प्रभावों का गहन अध्ययन कर रहा है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि उसने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई टिप्पणियों पर ध्यान दिया है। साथ ही, अमेरिकी प्रशासन द्वारा घोषित नए कदमों के असर का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि भारतीय व्यापार और उद्योग पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में कहा कि राष्ट्रपति द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए गए व्यापक टैरिफ कानूनी दायरे से बाहर थे और यह कदम उनके अधिकार क्षेत्र से अधिक था। इस निर्णय को ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की आर्थिक नीतियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

150 दिनों के लिए 10% अस्थायी इम्पोर्ट सरचार्ज

फैसले के बाद 20 फरवरी की राष्ट्रपति घोषणा में कहा गया कि 24 फरवरी 2026 से 150 दिनों के लिए अमेरिका में आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का अस्थायी एड-वेलोरम (मूल्य आधारित) आयात अधिभार लगाया जाएगा। यह 10 प्रतिशत शुल्क मौजूदा एमएफएन (मोस्ट फेवर्ड नेशन) या सामान्य आयात शुल्क के अतिरिक्त होगा।

भारत पर टैरिफ में उतार-चढ़ाव

अमेरिका ने अगस्त में भारत पर 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था। इसके बाद रूस से कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगाया गया, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया। हालांकि, हाल ही में दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सहमति बनी, जिसके तहत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने का प्रस्ताव सामने आया। फिलहाल दंडात्मक 25 प्रतिशत शुल्क हटा दिया गया है, जबकि शेष 25 प्रतिशत लागू था। अब नई घोषणा के बाद 24 फरवरी 2026 से भारतीय वस्तुओं पर प्रभावी टैरिफ 10 प्रतिशत रह जाएगा।

व्यापार समझौते की प्रक्रिया जारी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि भारत के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं होगा और वार्ता जारी रहेगी। द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल 23 फरवरी 2026 से वॉशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक करेगा।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंध

2021-25 के दौरान अमेरिका भारत का सबसे बड़ा वस्तु व्यापार साझेदार रहा है। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत, आयात में 6.22 प्रतिशत और कुल द्विपक्षीय व्यापार में 10.73 प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार 186 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें भारत का निर्यात 86.5 अरब डॉलर और आयात 45.3 अरब डॉलर रहा। यह दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक संबंधों को दर्शाता है।


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