
पान मसाला पर 88% टैक्स वसूलेगी सरकार, वित्त वर्ष 2026-27 में सिर्फ सेस से ही आएंगे ₹14,000 करोड़
वित्त वर्ष 2026-27 में पान मसाला के विनिर्माण पर लगाए गए स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर से सरकार को 14,000 करोड़ रुपये की कमाई होने की उम्मीद है। पान मसाले पर 1 फरवरी, 2026 से स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर लगाया गया है, जो 40 प्रतिशत जीएसटी से अलग है। इस उपकर (Cess) की गणना पान मसाला बनाने वाली कंपनियों की उत्पादन क्षमता के आधार पर की जाएगी। 40 प्रतिशत जीएसटी को जोड़ने के बाद पान मसाले पर कुल टैक्स भार 88 प्रतिशत ही रहेगा। बजट दस्तावेजों के अनुसार, सरकार को चालू वित्त वर्ष के बाकी दो महीनों (फरवरी और मार्च) में स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर से 2330 करोड़ रुपये और 2026-27 में 14,000 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है।
पान मसाला पर लगाए जाने वाले सेस का पैसा कहां खर्च करेगी सरकार
पान मसाला बनाने वाली कंपनियों की उत्पादन क्षमता पर लगाए गए सेस से मिलने वाला पैसा राज्यों के साथ स्वास्थ्य जागरूकता या स्वास्थ्य से जुड़ी दूसरी योजनाओं/गतिविधियों के जरिए साझा किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिसंबर 2025 में संसद में कहा था कि इस हेल्थ सेस का उद्देश्य राष्ट्रीय महत्व के दो क्षेत्रों- स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक “समर्पित और अनुमानित संसाधन प्रवाह” बनाना है। पान मसाला पर इस तरह का सेस लगाने और तंबाकू पर एक्साइज ड्यूटी लगाने को दिसंबर में संसद ने मंजूरी दी थी।
GST काउंसिल ने सितंबर 2025 में किया था बड़ा फैसला
केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली GST काउंसिल ने सितंबर 2025 में फैसला किया था कि लोन चुकाने के बाद जब कंपनसेशन सेस मैकेनिज्म खत्म हो जाएगा, तो ऐसे उत्पादों पर GST के अलावा सेस और एक्साइज ड्यूटी लगाने का तरीका तय किया जाएगा। GST काउंसिल ने फैसला किया था कि कोरोना महामारी के दौरान GST रेवेन्यू के नुकसान के लिए राज्यों को मुआवजा देने के लिए लिए गए लोन के भुगतान के बाद कंपनसेशन सेस खत्म हो जाएगा। 31 जनवरी, 2026 तक 2.69 लाख करोड़ रुपये का लोन चुका दिया जाएगा।
