GDP आकंड़ों में फर्जी कंपनियां भी शामिल, जानिए क्या है नया विवाद

 

नई दिल्ली: देश के विकास के पैमाने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़ों को लेकर एक बार फिर विवाद छिड़ गया है। सांख्यिकी मंत्रालय के तहत आने वाले नैशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (NSSO) ने कहा है कि GDP कैलकुलेशन के लिए 2015 से जिस डेटाबेस का इस्तेमाल किया गया है उसमें शामिल एक तिहाई कंपनियां या तो बंद हो चुकी हैं, लापता हैं या उन्हें गलत तरीके से वर्गीकृत किया गया है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया जा रहा है।हालांकि, सरकार ने कहा है कि इसका मौजूदा GDP आंकड़ों पर कोई असर नहीं पड़ा है।

यह है जड़
जनवरी 2015 में जब केंद्र ने GDP गणना के तरीके में बदलाव किया (आधार वर्ष 2004-05 को बदलकर 2011-12 किया गया) तो इसने कंपनी फाइनैंस पर आरबीआई रिपोर्ट की बजाय मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स के ‘MCA-21’ डेटाबेस इस्तेमाल का भी फैसला किया। इससे आंकड़ों की शुद्धता में सुधार की उम्मीद थी, खासकर सर्विस सेक्टर के लिए, जिसका GDP में 60 फीसदी योगदान होता है।

सरकार की सफाई
सांख्यिकी मंत्रालय ने कहा है कि एक आधिकारिक कमिटी रिपोर्ट की जांच करेगी और इन ‘गायब कंपनियों’ का मौजूदा GDP अनुमान पर कोई असर नहीं होगा, क्योंकि समग्र स्तर पर उपयुक्त समायोजन किया जा चुका है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि NSSO स्टडी की शुरुआत डेटा गैप को समझने और भविष्य के लिए उपचारात्मक कदम उठाने के उद्देश्य से किया गया है। इसकी सराहना होनी चाहिए कि GDP अनुमान में हर बार बदलाव उस समय मौजूद डेटा के आधार पर किया जाता है, जिसका कवरेज और क्वॉलिटी समय के साथ बेहतर होता है।

दो पक्ष-दो तर्क
कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि GDP गणना में ‘शेल कंपनियों’ को शामिल करना ठीक नहीं है, क्योंकि वे किसी सेवा या वस्तु का उत्पादन नहीं करती हैं। वहीं, दूसरा पक्ष सरकार के नजरिए के साथ है कि इकॉनमी में हुए प्रत्येक ट्रांजैक्शन, शेल कंपनियों का भी, असर होता है (हो सकता है कि एक वैध कंपनी लेनदेन छुपाने के लिए शेल कंपनी का इस्तेमाल कर रही हो)।

उठते रहे हैं सवाल
GDP डेटा को लेकर सवाल नए नहीं हैं और यह भी ताजा विवाद की एक वजह है। 2015 में GDP की नई सीरीज आई। नए फॉर्म्युले पर आए पिछले सालों (यूपीए सरकार) के आंकड़े पहले के अनुमानों से अलग थे और इस सरकार का प्रदर्शन बेहतर दिखा। बैक सीरीज डेटा (2011-12 से पहले के आंकड़े) को सेंट्रल स्टैटिक्स ऑफिस की जगह मोदी सरकार द्वारा गठित नीति आयोग ने जारी किया और इससे विवाद और बढ़ गया। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) ने पिछले महीने कहा कि सरकार को GDP फॉर्म्युले को लेकर कुछ मुद्दों को हल करना होगा।

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