मध्यप्रदेश हनीट्रैप की पूरी कहानी, वीडियो-ब्लैकमेलिंग से लेकर नौकरशाहों में टकराव तक

 

17 सितंबर को मध्यप्रदेश के इंदौर जिले नगर निगम में कार्यरत इंजीनियर हरभजन सिंह ने पलासिया थाने में खुद को ब्लैकमेल किए जाने की एफआईआर दर्ज कराई थी तो उन्हें भी इसका अंदाजा नहीं था कि यह मामला इतना बड़ा बन सकता है। अब जैसे-जैसे प्रदेश में फैली हनीट्रैप मामले की कहानियां उजागर होनी शुरू हुई है वैसे-वैसे इसमें कई नौकशाह, राजनेता और पत्रकारों की संदिग्ध भूमिका सामने आ रही है।

एफआईआर में हरभजन सिंह ने दावा किया था कि उन्हें 29 वर्षीय आरती दयाल नाम की एक महिला द्वारा ब्लैकमेल किया जा रहा था। उक्त महिला ने तीन करोड़ रुपये की रंगदारी की मांग की थी और ऐसा न करने पर इंजीनियर के कथित अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी गई थी।

पुलिस ने जब जांच शुरू की तब पता चला कि एक गैर सरकारी संगठन ने कथित तौर पर राजनेताओं, नौकरशाहों और कई बड़े रसूखदारों को ब्लैकमेल करने के लिए उनके अश्लील वीडियो बनाए हैं। जिन्हें सार्वजनिक करने की धमकियों के एवज में जबरन वसूली की जाती थी।

जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में गिरोह के द्वारा छह वरिष्ठ राजनेताओं और कम से कम 10 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के अलावा सिविल इंजीनियरों और बिल्डरों को लालच दिया गया था। इनमें से कुछ से वसूली करने की भी खबरें हैं। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

इस मामले में पुलिस ने भोपाल की संदिग्ध मास्टरमाइंड श्वेता स्वप्निल जैन सहित पांच महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया गया है। जबकि इनके वकीलों ने दावा किया है कि इस मामले को जबरन गढ़ा गया है, वहीं आरोप लगाया गया कि पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में यातना भी दी है।

इस बीच, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे मध्यप्रदेश की नौकरशाही और राजनीति में उथल-पुथल मचती दिख रही है। भाजपा और कांग्रेस भी मामले को लेकर एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।

 
 

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