‘हमारे मजहब में इजाजत नहीं’, वंदे मातरम् पर जारी गाइडलाइंस पर भड़के सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन

‘हमारे मजहब में इजाजत नहीं’, वंदे मातरम् पर जारी गाइडलाइंस पर भड़के सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन

केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ गीत को लेकर नई गाइडलाइन जारी हैं, जिस पर समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद और नेता एसटी हसन ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने हमारे देश में हर धर्म और समुदाय के लोग रहते हैं लेकिन, ये सरकार सिर्फ कंट्रोवर्सी करके ही जीत रही है. इन्होंने अब नया शिगूफा छोड़ा है ताकि फिर से हिन्दू-मुसलमान हो और अपना वोट बैंक पोलराइज कर सके.

‘वंदे मातरम्’ पर सपा नेता का बड़ा बयान

सपा के पूर्व सांसद ने कहा कि हमारा देश अनेकता में एकता का देश है. ये हमारी विशेषता है इसी ने हमारे देश को खूब बना रखा है. बहुत से लोग वन्दे मातरम् को इबादत मानते हैं, खासतौर से मुसलमान लोग ये मानते हैं कि जमीन की पूजा कर रहे हैं, जो हमारे मजहब में अलाउड नहीं है.

हिंदुस्तान में सिख, ईसाई, मुसलमान और लोग भी रहते हैं और कुछ ऐसे लोग भी रहते हैं जो ना अल्लाह की मानते हैं ना ईश्वर को मानते हैं वो नास्तिक होते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी इस बात का जजमेंट दिया था कोई काम या कोई गीत गाने के लिए कि किसी को बाध्य नहीं कर सकते हैं. इस गीत से क्या हमारी इंडस्ट्री पर फर्क पड़ने वाला है या महंगाई कम होने वाली है या नौकरियां मिलने वाली हैं?

‘नेशनल इंटीग्रिटी को होगा नुकसान’

एसटी हसन ने कहा कि इससे नेशनल इंटीग्रेशन को नुकसान होगा, लोगों के अंदर कंट्रोवर्सी पैदा होगी और ये सरकार तो हमेशा कंट्रोवर्सी करके ही जीत रही है, कुछ और करने के लिए नहीं है. अब नया शिगूफा ये छोड़ा है ताकि हिंदू मुसलमान फिर करें और अपना वोट बैंक को पोलराइज करें.

यकीनी तौर पर च्वाइस होनी चाहिए किसी को आप मजबूर नहीं कर सकते आप कुछ कहने के लिए. आप देखते नहीं यदि कोई मुसलमान से डंडे के जोर पर जयश्री राम कहने को कहता है तो कोर्ट उसपर एक्शन लेती है.

बता दें कि केंद्र सरकार ने वंदे मातरम् गीत को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं. जिसके मुताबिक राष्ट्रगान और वंदे मातरम् दोनों ही गाना अनिवार्य हो गया है  वो भी निर्धारित समय तीन मिनट दस सेकेंड में. पहले वंदे मातरम् गीत गाया जाएगा और फिर राष्ट्रगान. इस दौरान राष्ट्रगान की तरह ही सावधान मुद्रा में खड़ा होना होगा.


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