नासा के पूर्व एस्ट्रोनॉट ने भी माना चंद्रयान-2 का लोहा, कहा- भारत का मिशन बेहद दुर्लभ और महत्वपूर्ण

 

खास बातें

  • नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री ने चंद्रयान-2 मिशन को बताया बेहद महत्वपूर्ण 
  • आज तक कोई भी यान दक्षिणी ध्रुव पर नहीं उतारा गया। भारत का यह मिशन उसे विश्व के चार ऐसे देशों की सूची में ले आएगा
  • यह खोज भविष्य के अंतरिक्ष मिशन में मदद करेगी

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री डोनाल्ड ए थॉमस का कहना है कि भारत का चंद्रयान-2 मिशन अंतरिक्ष और चंद्रमा के अध्ययन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मिशन है। इस पर अमेरिका सहित पूरे विश्व की निगाहें टिकी हैं। उन्हाेंने इसे बेहद दुर्लभ मिशन बताया।

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चंद्रयान-2 मिशन 22 जुलाई को पृथ्वी से चंद्रमा के लिए रवाना किया गया था, इसे सात सितंबर को चंद्रमा पर उतारने की योजना है। डोनाल्ड ने कोयंबटूर के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि मानव इससे पहले भी चंद्रमा पर पहुंचा है। लेकिन वे अंतरिक्ष यान चंद्रमा की भूमध्य रेखा के निकट उतारे गए थे। आज तक कोई भी यान दक्षिणी ध्रुव पर नहीं उतारा गया। भारत का यह मिशन उसे विश्व के चार ऐसे देशों की सूची में ले आएगा जिन्होंने चंद्रमा पर यान उतारे हैं।

वहां हो सकती है बर्फ

उन्हाेंने कहा कि चंद्रमा का यह हिस्सा बेहद विशेष है। उम्मीद की जा रही है यहां बर्फ हो सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो इस बर्फ से पानी, ऑक्सीजन और हाइड्रोजन प्राप्त किए जा सकेंगे। यह खोज भविष्य के अंतरिक्ष मिशन में मदद करेगी।

अधिक रेडिएशन मानव के लिए मुश्किलें

चंद्रमा पर मानव के रहने के संदर्भ में उन्हाेंने कहा कि चंद्रमा पर मौजूद रेडिशन की अधिक मात्रा की वजह से यह बेहद मुश्किल है। वहीं दिन के समय यहां तापमान 100 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है तो रात के समय 100 डिग्री से भी कम हो जाता है।
 
 

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