अहमदाबाद। भारत में जनसंख्या नियंत्रण पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनसंख्या की वृद्धि दर गिर रही है, इसका कारण शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और समृद्धि है। हम में से प्रत्येक के बीच परिवार का आकार, समय बीतने के साथ छोटा हो रहा है। जयशंकर ने इसी के साथ कहा कि जबरन जनसंख्या नियंत्रण के बहुत खतरनाक परिणाम हो सकते हैं, यह लिंग असंतुलन पैदा कर सकता है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार और उसके कई मंत्री जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कई बार बिल पेश करने की बात कह चुके हैं।

हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र को लेकर बनाते हैं रणनीति

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी पुस्तक- द इंडिया वे : स्ट्रैटजीज फार एन अनसर्टेन व‌र्ल्ड के गुजराती में अनुवाद के विमोचन समारोह में कहा कि जब हम भारत के समुद्री हितों पर बात करते हैं तो हमारा नजरिया केवल हिंद महासागर तक ही सीमित नहीं होता, हम प्रशांत महासागर क्षेत्र की भी बात कर रहे होते हैं। हम जो भी रणनीति बनाते हैं वह हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए बनाते हैं। इस क्षेत्र को केंद्र में रखकर पूरी दुनिया रणनीति तैयार कर रही है।

सबका साथ-सबका विश्वास आधारित है विदेश नीति

जयशंकर ने आगे कहा कि दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश के रूप में भारत का आत्मविश्वास प्रदर्शित करना है। अमेरिका के साथ मिलकर, चीन का इंतजाम करते हुए, यूरोप से लाभ लेते हुए, रूस को आश्वस्त करते हुए, जापान को साथ लाते हुए भारत को कार्य करना है। सबका साथ और सबका विश्वास, यही भारत की विदेश नीति है। इसलिए जब हम समुद्री हितों की बात करते हैं तो वह कई समुद्रों की बात होती है। यह हमारी सोच की बढ़ी सीमाओं का प्रतीक है। विदेश मंत्री ने कहा, हमारा 50 प्रतिशत से ज्यादा व्यापार पूर्व की ओर होता है। यह माल प्रशांत महासागर के जरिये जाता है। ऐसे में हमारा उसके विषषय में सोचना स्वाभाविक है। यह हिंद महासागर से मिला हुआ समुद्री क्षेत्र है। हमारे हितों का दायरा अब ब़़ढ रहा है, इसलिए हमें सोच का दायरा भी ब़़ढाना होगा।

सोच बदलने की जरूरत

अपनी पुस्तक के एक अध्याय पर चर्चा करते हुए जयशंकर ने कहा, हम दूसरे देशों की समस्याओं में हस्तक्षेप नहीं करते थे। यह स्थिति 1950-1960 के समय थी। तब हम हस्तक्षेप करने की हैसियत में नहीं थे। लेकिन अब जबकि हम दुनिया की पांचवीं अर्थव्यवस्था वाले देश बन गए हैं, तब हमें सोच बदलनी होगी। हम दुनिया में पांचवें स्थान पर आकर 20 वें स्थान वाली सोच नहीं रख सकते। हमें अपना नजरिया विस्तृत करना होगा, उसके अनुसार कदम उठाने होंगे-निर्णय लेने होंगे।