अर्थव्यवस्था की बिगड़ती हालत को थामने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 10 बड़े ऐलान

 

अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती दूर करने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई घोषणाएं की हैं। ये घोषणाएं बाजार, उद्योग, आम आदमी को राहत देने वाले हैं। आइए, जानते हैं वित्त मंत्री के 10 बड़े ऐलान, जिनका आपसे है सीधा जुड़ाव।

हाइलाइट्स

  • अर्थव्यवस्था की सुस्ती दूर करने के लिए वित्त मंत्री ने कई बड़े ऐलान किए
  • वित्त मंत्री ने अपनी घोषणाओं में उद्योग, बाजार और आम आदमी को दी है तवज्जो
  • निर्मला सीतरमन ने साफ किया है कि आरबीआई के रेट कट का फायदा बैंकों को देना होगा
  • जीएसटी व्यवस्था को आसान बनाने के लिए भी वित्त मंत्री ने की अहम घोषणा

नई दिल्ली
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती को दूर करने के लिए शुक्रवार को कई कदम उठाने की घोषणा की। वित्त मंत्री ने उपभोक्ताओं के बीच मांग बढ़ाने से लेकर उद्योग जगत को भी राहत देने के उपायों का ऐलान किया। पिछले कुछ महीने से ऑटोमोबाइल सहित कई अन्य उद्योगों की बिगड़ती हालत को देखते हुए वित्त मंत्रालय को ये कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। वित्त मंत्रालय ने कहा है कि अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए ये कदम उठाए जा रहे हैं। आइए जानते हैं, मंत्रालय के इन उपायों का आप पर क्या असर पड़ेगा।

सस्ते होंगे होम, ऑटो लोन
वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों ने रिजर्व बैंक की ओर से रीपो दर में कटौती का फायदा ग्राहकों को पहुंचाने का फैसला किया है। इसके लिए बैंकों ने अपनी एमसीएलआर में कटौती की है। उन्होंने कहा कि बैंक रीपो दर से जुड़े अथवा दूसरी किसी बाहरी-स्टैंडर्ड रेट से लिंक्‍ड लोन प्रॉडक्ट पेश करेंगे। इससे होम, ऑटो और अन्य रीटेल लोन की ईएमआई सस्ती हो जाएंगी। इसके अलावा, सरकारी बैंक ग्राहकों को लोन बंद होने के 15 दिनों के भीतर लोन डॉक्युमेंट्स वापस करेंगे। इससे जहां ग्राहकों का उत्पीड़न रुकेगा, वहीं उन लेनदारों को फायदा मिलेगा जो लोन लेने के लिए अपनी संपत्ति गिरवी रखते हैं।

NBFC अब आसानी से लोन देगी

गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (एनबीएफसी) को जारी किए गए पूर्वभुगतान नोटिसों की बैंक निगरानी करेंगे। सीतारमण ने कहा कि एनबीएफसी को प्रक्रियाओं के दोहरीकरण से बचने के लिए बैंकों के आधार सत्यापित केवाईसी का इस्तेमाल की अनुमति दी जाएगी। सरकार ने लोन प्रक्रिया को आसान करने के लिए आधार नियमों को सरल बनाने और मनी लॉन्ड्रिंग कानून में आवश्यक बदलाव करने का निर्णय किया है।

30 दिनों में जीएसटी रिफंड
वित्त मंत्री ने वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली (जीएसटी) को और आसान करने का संकल्प लिया है, ताकि करदाताओं को सहूलियत हो। इसके साथ ही जीएसटी रिफंड में देरी के कारण कारोबार में मुसीबत झेलने वाले कारोबारियों को वित्त मंत्री ने राहत भी दी है। सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के अब तक के सभी लंबित जीएसटी रिफंड का भुगतान 30 दिन के भीतर कर दिया जाएगा। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में रिफंड मामलों को 60 दिन के भीतर निपटा दिया जाएगा।

ऑटो इंडस्ट्री को राहत
बिक्री में आई सुस्ती से जूझ रहे ऑटो सेक्टर को राहत देने के लिए कई उपायों की घोषणा की गई। सरकारी विभागों द्वारा गाड़ियों की खरीद पर लगी रोक को हटा लिया गया है। साथ ही आज से लेकर मार्च, 2020 तक खरीदी गईं गाड़ियों पर 15 प्रतिशत के अतिरिक्त मूल्यह्वास यानी डिप्रीशीएशन की अनुमति दी गई है। इससे यह 30 प्रतिशत हो जाएगा। इसके अलावा मार्च, 2020 तक खरीदी गईं बीएस 4 मानक वाली गाड़ियों का इस्तेमाल रजिस्ट्रेश की पूरी अवधि किया सकेगा।

इसके अलावा मांग बढ़ाने के लिए पुरानी गाड़ियों को कबाड़ करने की नीति भी लाई जाएगी। बिजली चालित वाहनों के साथ साथ पेट्रोल, डीजल जैसे ईंधन (आईसीवी) से चलने वाले वाहनों का रजिस्ट्रेशन जारी रहेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार सहायक उपकरणों-कलपुर्जों के लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगी। इनमें निर्यात के लिए बैटरियां भी शामिल हैं। वाहनों के भारी-भरकम रजिस्ट्रेशन शुल्क को अगले साल यानी जून, 2020 तक के लिए टाल दिया गया है।

बैंकों को मिलेगी 70 हजार करोड़ की पूंजी
सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 70 हजार करोड़ रुपये की पूंजी डालेगी। बैंक में पूंजी की उपलब्धता को सुधारने और कर्ज देने की क्षमता को बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है। सरकार के इस कदम से बैंक अधिक से अधिक लोन बांट सकेंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि इस कदम से बैंकिंग फाइनैंशल सिस्टम में पांच लाख करोड़ रुपये तक का कैश फ्लो होगा।

CSR नियमों का उल्लंघन आपराधिक नहीं
निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के उल्लंघन पर अब आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब सीएसआर नियमों का उल्लंघन दीवानी मामला होगा। उद्योग जगत ने संशोधित कंपनी कानून, 2013 में सीएसआर के उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधानों को लेकर चिंता जताई थी। सरकार ने संशोधित आदेश के जरिये कंपनियों को अपनी सीएसआर प्रतिबद्धताओं के तहत मौजूदा परियोजनाओं को पूरा करने के लिए और समय दे दिया है। इस कानून के तहत मुनाफा कमाने वाली कंपनियों के एक वर्ग को अपने तीन साल के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम दो प्रतिशत सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना होता है।

आयकर नोटिस का जल्द निपटारा
सभी टैक्स असेसमेंट का निपटारा तीन महीनों के भीतर हो जाया करेगा। इनकम टैक्स के ऑर्डर, समन और लेटर अब 1 अक्टूबर से सेंट्रलाइज्ड सिस्टम के जरिए जारी किया जाएगा।

FPI पर बढ़ा हुआ सरचार्ज वापस
सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की मांग को पूरा करते हुए उन पर बढ़ाया गया टैक्स सरचार्ज वापस ले लिया है। इस मामले में बजट से पहले की स्थिति बहाल कर दी गई है। 2019-20 के बजट में ऊंची कमाई करने वालों पर ऊंची दर से टैक्स सरचार्ज लगा दिया गया। एफपीआई भी इस बढ़े हुए सरचार्ज के दायरे में आ गए थे। बजट की घोषणा के बाद दो से पांच करोड़ रुपये की टैक्सेबल इनकम पर इनकम टैक्स की प्रभावी दर 35.88 प्रतिशत से बढ़कर 39 प्रतिशत पर पहुंच गई था। इसी तरह पांच करोड़ रुपये से अधिक की इनकम पर यह 42.7 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।

कैपिटल गेन्स पर भी सरचार्ज वापस
निर्मला सीतारमण ने कहा कि इक्विटी के लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स पर सरचार्ज बढ़ोतरी के फैसले को भी वापस लिया गया है।

स्टार्टअप से एंजेल टैक्स हटा
वित्तमंत्री ने स्टार्टअप से एंजेल टैक्स हटाने का भी ऐलान किया। सीतारमण ने कहा कि स्टार्टअप्स और उनके निवेशकों की दिक्कतों को दूर करने के लिए उनके लिए एंजेल टैक्स के प्रावधान को भी वापस लेने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के सदस्य के तहत स्टार्टअप्स की समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रकोष्ठ बनाया जाएगा। स्टार्टअप रजिस्टर्ड कराने के दौरान इनकम टैक्स का सेक्शन 56 2(b) लागू नहीं होगा।

 

 

 
 

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