CM योगी के मुजफ्फरनगर दौरे के बीच अखिलेश यादव ने फिर दी इस मुद्दे को हवा, कहा- ‘जो BJP के साथ वो भी…’

CM योगी के मुजफ्फरनगर दौरे के बीच अखिलेश यादव ने फिर दी इस मुद्दे को हवा, कहा- ‘जो BJP के साथ वो भी…’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज सोमवार को मुजफ्फरनगर दौरे पर है, इस बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर से मेरठ के व्यापारियों के मुद्दे को हवा दी है. सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी देश में व्यापारियों को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं. ताकि सारी अर्थव्यवस्था पर पार्टी को चंदा देने वाले खरबपतियों का कब्जा हो जाए.

अखिलेश यादव ने साधा निशाना

अखिलेश यादव ने एक्स पर एक लंबी पोस्ट कर लिखा- ‘1857 की क्रांति के बाद अब मेरठ से एक और स्वतंत्रता आंदोलन जन्मेगा… और वो होगा आज के साम्राज्यवादी सत्ताधारी गिरोह और उनके संगी-साथियों के खिलाफ.

सच्चाई तो ये है कि बीजेपी ने पहले भूमि अधिग्रहण, काले क़ानूनों जैसे दुष्प्रयासों से खेतीबाड़ी-किसानी ख़त्म करनी चाही और अब यूएस डील और मल्टीनेशनल व कुछ अकूत दौलत के मालिकों के इशारे पर भाजपा भारत का व्यापार ख़त्म कर रही है. जिससे कुल मिलाकर सारी इकॉनमी पर भाजपाइयों व उनको सीधे चंदा देनेवाले खरबपतियों का क़ब्ज़ा हो जाए और परंपरागत व्यापारियों का कारोबार सड़कों पर भी जगह न पा पाए.

जो बड़े व्यापारी, स्टॉकिस्ट आज भी भाजपा के साथ हैं, आज-कल में वो भी भाजपा की गलत नीतियों और मंसूबों का शिकार बनेंगे, वो भी नहीं बचेंगे. ये बात अब सबको समझ आ रही है, इसीलिए हर व्यापारी, दुकानदार, कारख़ाना मालिक, सूक्ष्म-लघु-मध्यम स्तर का उद्यमी अब बीजेपी के विरुध्द एकजुट हो रहा है। उसका भ्रम टूट गया है.

उसे भी अब समझ आ गया है कि ‘भाजपा किसी की सगी नहीं है’ का मतलब साफ़ है कि भाजपा उस अकूत महा-राशि के सिवाय किसी की सगी नहीं है; जो वो कमीशन, चंदे के नाम पर एकमुश्त वसूल लेती है. भाजपा के भ्रष्टाचार का पेट सुरसा का मुंह है.

दरअसल भाजपा का बुलडोज़र दुकानों-मकानों पर नहीं बल्कि भारत की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था पर चलाया जा रहा है. आज बीजेपी देश की अर्थव्यवस्था को ख़त्म करने का जितना बड़ा षड्यंत्र कर रही है, उतना बड़ा तो परतंत्रता के दौर में साम्राज्यवादियों ने भी नहीं किया था.

आज बीजेपी जिस आर्थिक ग़ुलामी को देशवासियों पर थोपने की साज़िश कर रही है, उसे देश के छोटे-से-छोटे व्यापारी, दुकानदार, रेहड़ी-पटरी-फेरीवाले से लेकर साप्ताहिक हाट, सब्ज़ी मार्केटवाले और बड़े कारोबारी, स्टॉकिस्ट, उद्यमी तक कामयाब नहीं होने देंगे। सब मिलकर इसका विरोध करेंगे.

मेरठ न तो 1857 की क्रांति भूला है न ये बात कि भाजपा ने 2014/19/24 के आम चुनावों की शुरुआत मेरठ से ही करी थी, इसीलिए भाजपा के निर्णायक अंत का आरंभ भी मेरठ ही करेगा. इसीलिए मेरठ से एक बार फिर ‘नया आर्थिक स्वतंत्रता आंदोलन’ जन्म ले रहा है. मेरठ आर्थिक ग़ुलामी को कभी स्वीकार नहीं करेगा. मेरठ फिर से स्वाधीनता का प्रतीक बनेगा; मेरठ न कभी झुका है, न झुकेगा!’


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