मूसलाधार बारिश से नकुड पानी पानी, नाले ओवरफलो होने से सडके बनी नहर, कई घरो मे पानी घुसा

मूसलाधार बारिश से नकुड पानी पानी, नाले ओवरफलो होने से सडके बनी नहर, कई घरो मे पानी घुसा
फेाटेा नकुड़ में जल भराव बना मुसिबत

नकुड 1 सितबंर इंद्रेश। मुसलाधार बरसात ने पूरे क्षेत्र को पानी पानी कर दिया। नगर की कई बस्तियो मे पानी भर गया। नगर के सभी नाले ओवर फलो हो गये। नालो का पानी सडको पर बह रहा है। तालाब तक ओवरफलो हो गये है। उनका पानी खेतो मे फैल गया।

सोमवार को सुबह पांच बजे से बरसात शुरू हुई। दस बजे तक हल्की बारिश होती रही। लेकिन ग्यारह बजते ही क्षेत्र मे मुसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया। जो शाम तीन बजे तक चलता रहा । इस दौरान कस्बे के मौहल्ला चैधरियान, व मौहल्ला महादेव मे नाले ओवरफलो हो गये। उनका पानी गलियो से होता हुआ घरो त कमे भर गया। होलीवाला चैक पर तो महादेव मंिदर तक सडक पर पानी ही पानी था। नालियो का पानी दुकानो मे घुस जाने से हालात ओर खराब हो गये।

फेाटेा नकुड़ में जल भराव बना मुसिबत

बरसात इतनी तेज थी कि नालो का ओवरफलो पानी थाने व नगर पालिका परिसर तक में भर गया। तहसील के पास तो पूरे परिसर मे नाले से निकला पानी भरा था। इसके अलावा यह पानी एसडीएम आवास के सामने से होकर हरिजन बस्ती मे चला गया। बाल्मीकि बस्ती पूरी नाले के पानी से पानी पानी हो गयी। गलियेा मे कई फुट तक पानी भरा था। जुडडी रोड पर गुग्गा माढी पर मेला चल रहा था। वंहा तालाब ही ओवरफलो हो गया। मेले मे लगे टेंट तीन से चार फुट तक पानी मे डुब गये। माढी के रास्त्ेा पर कई कई फुट तक पानी होने से माढी तक जाने का रास्ता ही बंद हो गया।

मल्हामाजरा रोड पूरी तरह से जलमग्न हो गया। सीएचसी तक जाने का रास्ता बंद हो गया। कई फुट तक पर रास्ते मे पानी भरा होने से आपात स्थिति मे अस्पताल जाने वाले व्यक्तियेा को गंदे पानी से होकर अस्तपाल जाना पडा। केएलजीएम इंटर कालेज मे बना 60 फुट गहरा रिचार्ज वेल पूरी तरह से पानी से भर गया। उपर तक पानी से भरने से विद्यालय का स्टाफ अंचभित है। उनका कहना है कि इस रिचार्ज वेल को बरसात के पानी से जमीन के वाटर लेवल को चार्ज करने के लिये बनाया गया था।

नकुड का पानी अघ्याना के खेतो तक मे भर गया। जिससे फसले जलमग्न हो गयी। खेतो मे खडी गन्ने व चारे की फसले डूब रही है। सैंकडो बीघा अघ्याना व चंद्रपालख्ेाडी का क्षेत्रफल नकुड के पानी से जलमग्न है। फसले डूब रही है। फसले नष्ट होने से किसानो के चेहेरे मरझा गये है। लोग नकुड के तालाब के पानी की निकासी की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग कर रहे है।