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नहीं रहीं दिल्ली की सबसे बुजुर्ग डॉक्टर पद्मावती, 103 वर्ष की उम्र में निधन

नहीं रहीं दिल्ली की सबसे बुजुर्ग डॉक्टर पद्मावती, 103 वर्ष की उम्र में निधन

नई दिल्ली
डॉक्टर पद्मावती नहीं रहीं। उनका रविवार को 103 साल की उम्र में निधन हो गया। वह अविवाहित थीं। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पद्मावती अपने आप में एक जीवित किवदंती थीं। वह 1950 से दिल्ली के मेडिकल क्षेत्र में सक्रिय थीं। यानी 70 वर्षों से। रंगून मेडिकल कॉलेज और फिर इंगलैंड में मेडिसन की डिग्री लेने के बाद डॉ. पद्मावती दिल्ली आ गई थीं। उनके बारे में देश की पहली स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर को मालूम चला।

उन्होंने डॉ. पद्मावती को तुरंत लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में पढ़ाने का आग्रह किया। जिसे उन्होंने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। फिर वह वहां अध्यापन करने के साथ-साथ ओपीडी में बैठने लगीं। एक बार डॉ. पद्मावती बता रही थीं कि सरकार ने 1976 में उनसे मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल-डायरेक्टर की जिम्मेदारी को संभालने के लिए कहा। लेडी हार्डिंग की तरह वो यहां पर भी हृदय संबंधी रोगों पर विजय पाने के लिए शोध का नेतृत्व करने लगीं। हिन्दी, तमिल और इंग्लिश बोलने वाली डॉ. पद्मावती से मिलकर लगता था कि मानो आप इतिहास से साक्षात्कार कर रहे हों।

वह पंडित जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा और अटल बिहारी वाजपेयी से अपनी मुलाकातों और संबंधों का जिक्र किया करती थीं। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में डॉ. पद्मावती के छात्र रहे साउथ दिल्ली के आशलोक अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. आलोक चोपड़ा कहते हैं कि डॉ. पद्मावती की मृत्यु से लगा कि आज मैंने अपनी मां को खो दिया। उनका अपने विषय पर पूरा अधिकार था। उनकी क्लासेज में सब स्टूडेंट्स हर हाल में आते थे। मुझे तो लगता है कि वह संसार की सबसे बुजुर्ग हृदय रोग विशेषज्ञ थीं।

डॉ. पद्मावती के 19 जून को जन्म दिन पर उनके दर्जनों स्टूडेंट्स और सहयोगी उनके सफदरजंग एनक्लेव स्थित घर में आते। वहां पर वह सबको केक खिलाते हुए पूछती कि क्या नया शोध कर रहे हो। उम्र का असर उनकी काया को देखकर लगता है, पर उनकी स्मरण शक्ति अब भी किसी से कम नहीं है। डॉ. पद्मावती की डिक्शनरी में रिटायर शब्द के लिए स्थान नहीं है। वह सुबह-शाम रोगियों को देखा करती थीं। उनके जीवन का अटूट हिस्सा था सैर करना। डॉ. पद्मावती ने सारा जीवन समाज और मेडिकल पेशे को समर्पित कर दिया। उनसे बीच-बीच में उनके पुराने स्टूडेंट भी सलाह-मशविरा करने के लिए आते रहते थे। अब वे भी देश-विदेश के किसी अस्पताल के डायरेक्टर या शिखर पदों पर थे। नैशनल हार्ट इंस्टीट्यूट की स्थापना करने वाली डॉ.पद्मावती अपनी लंबी उम्र के लिए सैर तथा स्वीमिंग को क्रेडिट देती थीं।

डॉ. पद्मावती अपनी उपलब्धियां पर चर्चा करने से बचती थीं। डॉ. पद्मावती को सबसे अधिक आनंद आता था मेडिसन के संसार में हो रहे नए अनुसंधानों पर बात करने में। वह मानती थीं कि जो डाक्टर नई रिसर्च को लेकर अपने को अपडेट नहीं रखते, वो अपने पेश के साथ न्याय ही नही कर पाते। वह लगातार रिसर्च जनरल पढ़ती थीं। डॉ. पद्मावती की मृत्यु से दिल्ली ने अपना एक संरक्षक खो दिया है। उन्होंने लाखों दिल्ली वालों को सेहमतमंद किया था।

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