नागरिकता से पहले वोटर विवाद में सोनिया गांधी की मांग कोर्ट ने मानी, जवाब दाखिल करने के लिए दिया वक्त
नई दिल्ली। मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने से जुड़े विवाद में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कोर्ट में जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई सात फरवरी को तय कर दी।
राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील ने अदालत को बताया कि याचिका में जिन दस्तावेज का हवाला दिया गया है, वे कई दशक पुराने रिकार्ड हैं और उनकी जांच के लिए अतिरिक्त समय आवश्यक है।
यह मामला वकील विकास त्रिपाठी द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका से जुड़ा है, जिसमें अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया गया था। राउज एवेन्यू कोर्ट में चल रही सुनवाई में पहले ही दिल्ली पुलिस और सोनिया गांधी को नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया है कि वर्ष 1980-81 की मतदाता सूची में सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से पहले दर्ज किया गया था, जिसे बाद में हटाकर 1983 में फिर से जोड़ा गया। हालांकि, मजिस्ट्रेट अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा था कि शिकायत केवल पुराने और अप्रमाणित दस्तावेज की फोटोकापी पर आधारित है, जिनसे आपराधिक मामला नहीं बनता।
मजिस्ट्रेट अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि नागरिकता और मतदाता सूची से संबंधित विषय केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और इन्हें आपराधिक शिकायत के माध्यम से तय नहीं किया जा सकता। इसी आदेश के खिलाफ अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने पुनरीक्षण याचिका दाखिल की है, जिस पर अब सत्र अदालत सुनवाई कर रही है।
