संसद में घमासान: बिरला को स्पीकर पद से हटाने के नोटिस पर विचार करेगी लोकसभा, भाजपा-कांग्रेस ने जारी किया व्हिप

संसद में घमासान: बिरला को स्पीकर पद से हटाने के नोटिस पर विचार करेगी लोकसभा, भाजपा-कांग्रेस ने जारी किया व्हिप

नई दिल्ली। ओम बिरला को स्पीकर पद से हटाने का प्रस्ताव आगे बढ़ाने के लिए लोकसभा ने सोमवार को विपक्षी सदस्यों के नोटिस को सूचीबद्ध किया है। सदन में 50 सदस्यों के समर्थन पर नोटिस को स्वीकार किया हुआ माना जाएगा।

फिर प्रस्ताव पर चर्चा होगी और उस पर मतदान होगा। अगर 50 सदस्य नोटिस के समर्थन में खड़े नहीं हुए, तो प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सकेगा। इस संबंध में कांग्रेस और भाजपा दोनों ने तीन लाइन का व्हिप जारी किया है।

भाजपा ने अपने सांसदों को सोमवार व मंगलवार को और कांग्रेस ने अपने सांसदों को सोमवार से बुधवार तक सदन में मौजूद रहने का निर्देश दिया है।

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार से प्रारंभ हो रहा है। लोकसभा के सोमवार के एजेंडे में सिर्फ स्पीकर के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव ही एकमात्र सूचीबद्ध आइटम है।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने हाल ही में बताया था कि प्रस्ताव नौ मार्च को सदन में आएगा। यह नोटिस कांग्रेस के तीन सदस्य मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि पेश करेंगे।

प्रस्ताव में नेता प्रतिपक्ष और अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने से रोकने और विपक्ष की महिला सांसदों पर बेवजह के आरोप लगाने के स्पीकर के व्यवहार पर सवाल उठाया गया है।

इसमें विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित करने का भी जिक्र किया गया क्योंकि उन्होंने जनता के मुद्दे उठाए और पूर्व प्रधानमंत्रियों के विरुद्ध पूरी तरह से आपत्तिजनक व अपमानजनक बातें करने वाले सत्तारूढ़ दल के सदस्यों को डांटा तक नहीं।

इसमें आरोप लगाया गया है कि बिरला ने सदन के सभी वर्गों का विश्वास जीतने के लिए जरूरी निष्पक्ष रवैया अपनाना बंद कर दिया है और अपने पक्षपाती रवैया अपनाकर वह सदन के सदस्यों के अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं।

साथ ही ऐसे बयान और फैसले दे रहे हैं जो ऐसे अधिकारों को प्रभावित और कमजोर करते हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर सभी विपक्षी पार्टियों के 118 सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं।

उन्होंने कहा कि यह एक स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा है। हमने एक प्रस्ताव पेश किया है, जो नियमों और परंपरा के मुताबिक है। ये लोकतांत्रिक हथियार हैं, संसदीय लोकतंत्र के हथियार हैं। विपक्ष को पूरा अधिकार है। हम चर्चा करेंगे, देखते हैं उसके बाद क्या होता है।


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