केजरीवाल के खिलाफ CBI की चार्जशीट ‘कट-पेस्ट’, कोई सबूत नहीं; दिल्ली आबकारी नीति केस में बचाव पक्ष की दलील
नई दिल्ली। दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में अरविंद केजरीवाल की ओर से राउज एवेन्यू कोर्ट में आरोप तय किए जाने के मुद्दे पर शुरुआती दलीलें पेश की गईं। बचाव पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि केजरीवाल के खिलाफ कोई भी आपराधिक सामग्री नहीं है और CBI की ओर से दाखिल चार्जशीट महज पहले की चार्जशीटों का ‘कट-पेस्ट’ है।
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने दलीलों की रूपरेखा सुनी और बचाव पक्ष के अनुरोध पर आगे की सुनवाई के लिए मामले को 7 फरवरी तक स्थगित कर दिया। केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने पैरवी की, जबकि सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल डीपी सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि केजरीवाल मुख्यमंत्री के रूप में अपना आधिकारिक कर्तव्य निभा रहे थे और ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि उन्होंने कथित ‘साउथ लॉबी’ से किसी को पैसे लेने के लिए कहा हो। यह भी कहा गया कि केजरीवाल का नाम न तो पहली चार्जशीट में था और न ही तीन पूरक चार्जशीटों में। उनका नाम चौथी पूरक चार्जशीट में जोड़ा गया।
वरिष्ठ वकील ने अदालत को बताया कि चारों चार्जशीटों का विषयवस्तु मूल रूप से एक ही हैं और चौथी चार्जशीट पुराने आरोपों को दोहराने भर का प्रयास है। उन्होंने यह भी कहा कि आगे की जांच के लिए अदालत की अनुमति आवश्यक होती है और आगे लाई गई सामग्री ऐसी होनी चाहिए, जिससे आरोपी का दोष सिद्ध हो सके।
दलीलों के दौरान अदालत ने गवाह मगुंटा के बयान पर विस्तार से बताने को कहा, जिसने इस मामले में सरकारी गवाह बनने की बात कही है। आरोप है कि किसी ने मगुंटा से केजरीवाल की ओर से पैसे देने को कहा था। इस पर बचाव पक्ष ने दोहराया कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि केजरीवाल ने किसी को पैसे लेने का निर्देश दिया हो।
मामला उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें दावा किया गया है कि अब रद्द हो चुकी दिल्ली आबकारी नीति को अपने पक्ष में प्रभावित करने के लिए कथित ‘साउथ लॉबी’ द्वारा 100 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था।
