चिदंबरम को दो घंटे में पेश होने का सीबीआई-ईडी का नोटिस, वकील ने कहा- ‘सुप्रीम’ सुनवाई तक इंतजार करें

 

दिल्ली हाईकोर्ट से मंगलवार को आईएनएक्स मीडिया केस में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय की संयुक्त टीम उनकी गिरफ्तारी का प्रयास कर रही है। इसी क्रम में सीबीआई और ईडी की टीम मंगलवार शाम चिदंबरम के घर पर पहुंची थी, लेकिन वे नहीं मिले। इसके बाद टीम देर रात दोबारा चिदंबरम के घर पहुंची और दो घंटे में पेश होने का नोटिस चस्पा कर दिया।

इस नोटिस का कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के वकील अर्शदीप सिंह खुराना ने जवाब दिया है। खुराना ने नोटिस की खामी बताते हुए अपने जवाब में सीबीआई को लिखा कि मुझे यह बताने का निर्देश दिया गया है कि आपका नोटिस कानून के प्रावधान का उल्लेख करने में विफल रहा है, जिसके तहत मेरे मुवक्किल को 2 घंटे के भीतर हाजिर होने का नोटिस जारी किया गया है।

खुराना ने लिखा- इसके अलावा, मेरा मुवक्किल कानून में उसके लिए उपलब्ध अधिकारों का प्रयोग कर रहा है और 20 अगस्त को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था ताकि अग्रिम जमानत (आईएनएक्स मीडिया मामले में) को खारिज करने के आदेश के संबंध में तत्काल राहत की मांग की जा सके।

खुराना ने लिखा कि उनके मुवक्किल को सुप्रीम कोर्ट की ओर से बुधवार सुबह 10:30 बजे प्रस्तुत होकर हाईकोर्ट के जमानत याचिका खारिज किए जाने के आदेश के खिलाफ तत्काल विशेष अवकाश याचिका दाखिल करने की अनुमति दी गई है। इसलिए, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि तब तक मेरे मुवक्किल के खिलाफ कोई कार्रवाई न करें और सुबह 10:30 बजे सुनवाई का इंतजार करें

बता दें जमानत याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यह धनशोधन का एक अनूठा मामला है और इस तरह के मामले में जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा। चिदंबरम के वकील ने अपील के लिए तीन दिन का समय मांगा था, जिसे हाईकोर्ट ने अस्वीकार कर दिया।

इससे पहले, मंगलवार को चिदंबरम अदालत की कार्यवाही में उलझे थे वहीं सीबीआई टीम जोरबाग में उनके घर पर पहुंची लेकिन वह नहीं मिले। किसी के पास जानकारी नहीं है कि वह कहां हैं। इसके बाद ईडी की टीम भी उनके घर पहुंची लेकिन बैरंग लौट गई।

अदालत ने कहा- गलत संदेश जाएगा
न्यायमूर्ति सुनील गौड़ ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा। उन्होंने यह भी गौर किया कि जब कांग्रेस नेता को अदालत से राहत मिली हुई थी, उन्होंने पूछताछ में जांच एजेंसियों को स्पष्ट जवाब नहीं दिया। अदालत ने मामले में उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से भी इनकार कर दिया।

अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो जाने के बाद चिदंबरम ने आगे के कदम के बारे में विचार करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और सलमान खुर्शीद से मुलाकात की। सुप्रीम कोर्ट के एक अधिकारी ने सिब्बल को चिदंबरम की याचिका रजिस्ट्रार (न्यायिक) के समक्ष रखने को कहा जो इसे प्रधान न्यायाधीश के समक्ष रखने के बारे में फैसला करेंगे। सिब्बल से कहा गया है कि चिदंबरम की अपील का उल्लेख सुप्रीम कोर्ट में बुधवार सुबह 10:30 बजे किया जाए।

सिब्बल ने कहा कि क्योंकि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई संविधान पीठ में बैठे होंगे, इसलिए याचिका का उल्लेख सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश के समक्ष किया जाएगा। सिब्बल ने कहा कि उन्होंने प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन रजिस्ट्रार (न्यायिक) के जरिए सीजेआई की टीम से संपर्क हुआ।

आईएनएक्स मीडिया केस
2007 में वित्त मंत्री पी चिदंबरम के कार्यकाल में आईएनएक्स मीडिया को विदेश से 305 करोड़ रुपये स्वीकार करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की ओर से दी गई मंजूरी में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। इस मामले में कार्ति चिदंबरम के खिलाफ ईडी और सीबीआई दोनों जांच एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं। कार्ति पर प्रमुख आरोप ये है कि पिता के वित्तमंत्री रहते हुए उन्होंने इसका फायदा उठाकर कई कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया।

चिदंबरम पर बेटे के जरिए 300 करोड़ रिश्वत लेने का आरोप
एजेंसी का आरोप है कि आईएनएक्स मीडिया समूह में विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (एफआईपीबी) की अनुमति दिलाने के लिए चिदंबरम ने अपने पद का दुरुपयोग किया था और अपने बेटे कार्ति के जरिए 300 करोड़ से ज्यादा की घूस ली थी। पूछताछ में इंद्राणी बता चुकी है कि वह एफआईपीबी की मंजूरी के सिलसिले में कार्ति चिदंबरम से मिली थी।

 
 

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