
रक्तदान शिविर के नाम पर चल रहा है लाल खून का काला धंधा
नकुड 29 जनवरी इंद्रेश। रक्तदान शिविर के नाम पर खून का काला ध्ंाधा जोरो पर है। सडक के किनारे कहीं भी कुछ लोग आकर रक्तदान शिविर लगा लेते है। इन शिविरों मे मानक के अनुसार सफाई व रक्त की परीक्षण की व्यवस्था होती है। जिससे एचआईवी जैसी बिमारियों के फैलने के खतरे से इंकार नंही किया जा सकता है। इन शिविरो मे आक्समिक स्थिति मे रक्तदाताओ की सुरक्षा के लिये भी ही कोई विशेषज्ञ नहीं होता है।
बुद्धवार को नकुड मे कोतवाली के ठीक सामने एक कवर्ड टराली खडी करके रक्तदान केंद्र शुरू कर दिया गया। आश्चर्यजनक तथ्य है कि कोतवाली के सामने नाले के उपर लगाये गये इस रक्तदान केंद्र मे रक्त की जंाच की कोई व्यवस्था नंही थी । एचाआईवी पोजिटिव डोनर की पहचान करने की व्यवस्था न होने से ऐसा ब्लड यदि किसी मरीज को दिया जाता है तो उसके पोजिटिव होने के लिये कौन जिम्मेदार होगा इस सवाल का कोई जवाब आयोजक के पास नंही था। इसके अलावा हार्ट पेशेंट व सुगर पिडितो से ब्लड लेने पर उनका स्वास्थ्य बिगडने की स्थिति मे क्या होगा इसके लिये भी आयोजक कोई सवाल नही दे पाया।
पूछने पर आयोजक शाकिक ने बताया कि व लेब टेक्निशियन का काम करता है। उसने अपने नाम से ही सीएमओ से परमिशन ली हैं । मौके पर चलाई जा रही ओडियो मे ख्ुाले आम रक्तदान से बिमारी खत्म होने के दावे कर लोगो को रक्तदान के लिये प्ररित किया जा रहा था। साथ ही उ न्हे एक फं्रुटी व प्रमाणपत्र देने का प्रलोभन भी दिया जा रहा था। इस भुलावे मे आकर राहगीर रक्तदान करते देखे गये।
शाकिर ने एक कागज को फोटो अपने मोबाईल मे दिखाया कि उसके प्रार्थनापत्र पर ही सीएमओ की मोहर के साथ प्रमिटिड लिख दिया गया। हांलाकि सीएमओ ने ऐसी प्रमिशन देने से इंकार किया । नगर के चिकित्सक डा0विरेंद्र शर्मा ने कहा कि किसी भी ऐरे गेरे को ब्लड डोनेशन की प्रमिशन देना खतरनाक है। इनकी जांच होनी चाहिए। इन्हे प्रमिशन दिलाने वालो के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके अलावा डा0 केपी पवार ने कहा कि इस पर स्वास्थय विभाग को सख्ती से काम करना चाहिए।

