‘BJP के कुत्ते, पहले भौंकते हैं फिर काटते हैं…’, शिवसेना ने मुखपत्र सामना में साधा निशाना

‘BJP के कुत्ते, पहले भौंकते हैं फिर काटते हैं…’, शिवसेना ने मुखपत्र सामना में साधा निशाना

दिल्ली में आबकारी नीति मामले पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और डिप्टी मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 लोगों को राउज एवेन्यू कोर्ट ने बरी कर दिया है. जिसे लेकर शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के मुखपत्र सामना में लेख लिखा है जिसमें केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे मोदी-शाह की राजनीतिक बदले की भावना बताया और केंद्रीय जाँच एजेंसियों को भी आड़े हाथों लिया.

सामना में लिखा कि कोर्ट ने केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बरी कर दिया है. कोर्ट का ये आदेश मोदी-शाह की राजनीतिक बदले की भावना पर करारा तमाचा है. कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि उन पर लगे आरोपों में सच्चाई नहीं है. इसमें कोई आपराधिक साज़िश नहीं थी. कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई जांच की धज्जियां उड़ा दी हैं.

‘पीएम मोदी और अमित शाह माफी मांगे’

सामान ने शिवसेना ने आरोप लगाए कि भाजपा ने दिल्ली सरकार की शराब नीति पर आरोप लगाए और साजिश रची. इसकी वजह थी कि जनता द्वारा चुनी गई दिल्ली सरकार भाजपा की नहीं थी और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया भाजपा के खिलाफ बोल रहे थे. जिसकी वजह से केजरीवाल के घर पर छापा मारा गया, बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लंबे समय तक जेल में रखा गया.

अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के बरी होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को उनसे माफी मांगनी चाहिए और सीबीआई निदेशक, पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए, जिनके नेतृत्व में ये झूठी कार्रवाई की गई. ये पूरा मामला कितना झूठा और फर्जी है, अब अदालत में इसका खुलासा हो गया है. भारत की जांच एजेंसियां भाजपा सरकार के कुत्ते हैं, जिनके गले में पट्टा बंधा है. पहले वे भौंकते हैं और फिर बदन पर कूदकर काटते हैं. यह सब राजनीतिक आकाओं के आदेश पर हुआ.

झूठे मामलों में फंसाने के आरोप

पिछले दस सालों में विपक्ष को नेस्तनाबूद करने के लिए ऐसे कई झूठे मामले रचे गए. महाराष्ट्र में छगन भुजबल, अनिल देशमुख, नवाब मलिक और संजय राऊत को गिरफ्तार किया गया. छगन भुजबल को बरी कर दिया गया लेकिन, उन्हें ढाई साल तक जेल में रखा. ईडी अभी तक अनिल देशमुख, नवाब मलिक और संजय राऊत के खिलाफ मामला तैयार नहीं कर पाई है. अजित पवार और हसन मुश्रीफ को ईडी का डर दिखाकर पार्टी छोड़ने पर मजबूर किया.

अदालतों की अनदेखी के कारण ही ईडी और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों ने सच्चाई को कुचल दिया और शैतानी रूप धारण कर लिया. अगर अदालत ने समय रहते इन शैतानों को रोका होता तो भाजपा के अत्याचार शिविर इतने नहीं फैलते. प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और फडणवीस जैसे मुख्यमंत्री लोकतंत्र और संविधान की परवाह किए बिना इन अत्याचार शिविरों को चला रहे हैं.

अदालतें एवं जांच एजेंसियां इन अत्याचार शिविरों के तंबू के बंबू बनकर रह गई हैं. भाजपा द्वारा पोषित जांच एजेंसियां अदालत में भाड़े के टट्टू साबित की जा चुकी हैं. झूठे मामले गढ़ने वालों को अब सजा मिलनी चाहिए.


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