BJP सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल बोले ‘मां-बाप को छोड़ कर विदेश में मौज करने वालों के पासपोर्ट हो रद्द’
बीजेपी के राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने एक बेहद भावुक और गंभीर मामला सदन में उठाया है. संसद में जारी बजट सत्र के दौरान 11 फरवरी को उन्होंने मांग की कि जो संतान अपने माता-पिता को भारत में अकेला छोड़कर विदेश में रहते हैं और उनकी देखभाल नहीं करते हैं, उसका पासपोर्ट रद्द किया जाए. उन्होंने कहा कि “मां-बाप को भारत में तड़पता छोड़कर विदेश का आनंद लेने वालों का पासपोर्ट रद्द हो”.
उन्होंने सरकार से यह भी आग्रह किया कि हर छह माह पर माता-पिता से “Certificate of Fulfilled Obligation” लेना अनिवार्य किया जाए. उनका कहना था कि यह कदम बुजुर्गों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है.
बच्चों की सफलता के पीछे मां-बाप की तपस्या- राधा मोहन दास
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि करीब साढ़े तीन करोड़ भारतीय विदेशों में रह रहे हैं. इनमें से अधिकांश के माता-पिता या सास-ससुर भारत में ही रहते हैं. उन्होंने कहा कि इनकी सफलता के पीछे माता-पिता का त्याग, तपस्या और आर्थिक बलिदान शामिल है.
उन्होंने बताया कि कई माता-पिता ने बच्चों को विदेश भेजने के लिए जमीन-जायदाद तक बेच दी. सस्ती शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की सरकारी योजनाओं का भी योगदान रहा. लेकिन समय के साथ कई मामलों में संतानों का लगाव कम होता गया और बुजुर्ग अकेले पड़ गए.
दर्दनाक घटनाएं और कानून की सीमाएं
राज्यसभा में बोलते हुए डॉ. अग्रवाल ने दिल्ली और इंदौर की हालिया घटनाओं का जिक्र किया, जहां अकेले रह रहे माता-पिता की मृत्यु हो गई और उनकी संतान विदेश से लौटकर नहीं आई. उन्होंने कहा कि हर साल करीब पांच सौ ऐसे मामले सामने आते हैं.
उन्होंने मेटेंनेंस एंड वेलफेयर ऑफ द पैरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट, 2007 को दंतहीन कानून बताया. उनके अनुसार इसमें प्रावधान तो हैं, लेकिन राहत पाने के लिए बुजुर्गों को स्वयं अदालत जाना पड़ता है. यह व्यवस्था व्यावहारिक रूप से प्रभावी साबित नहीं हो रही है.
सप्ताह में एक बार फोन पर माता-पिता से बात करें- राधा मोहन दास
डॉ. अग्रवाल ने विदेश मंत्री से अपील की कि विदेश जाने वालों से हलफनामा लिया जाए. इसमें यह सुनिश्चित किया जाए कि वे अपनी आय का एक निश्चित हिस्सा माता-पिता को देंगे, केयरटेकर की नियुक्ति करेंगे और जीवन बीमा की व्यवस्था करेंगे.
उन्होंने कहा कि संतान सप्ताह में कम से कम एक बार टेलीफोन पर माता-पिता से बात करें. साथ ही हर छह माह पर माता-पिता से प्रमाण पत्र लिया जाए कि उनकी जिम्मेदारियां निभाई जा रही हैं. प्रमाण पत्र न मिलने पर संबंधित व्यक्ति का पासपोर्ट निरस्त कर उसे भारत वापस बुलाने का प्रावधान किया जाए.
