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भाजपा के पास कर्नाटक में सरकार बनाने का मौका,सत्ता पर टिकी येदियुरप्पा की निगाह

 

नई दिल्ली: भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की निगाह कर्नाटक में चल रहे घटनाक्रम पर ठहर गई है। बंगलूरू के सूत्र की मानें तो राज्य में भाजपा के पास सरकार बनाने का अवसर आ रहा है। बताते हैं यह अवसर जद(एस) और कांग्रेस के विधायक खुद दे रहे हैं। भाजपा के बेलगाम क्षेत्र के एक बड़े नेता का कहना है कि अगले सप्ताह तक आपको यह संभव होता दिखाई देगा। वहीं कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने प्रतिक्रिया में कहा है कि इंतजार कीजिए और देखिए। क्या हम संन्यासी हैं?

येदियुरप्पा का इशारा साफ है कि कांग्रेस-जद(एस) की एचडी कुमारस्वामी सरकार गिरते ही भाजपा सरकार बनाने का दावा पेश करेगी। येदियुरप्पा को इंतजार है कुल 15 विधायकों के इस्तीफे का। ऐसा होते ही भाजपा बहुमत में आ जाएगी और सरकार बनाने का रास्ता साफ हो जाएगा। उन्होंने प्रक्रिया में कहा भी कि इस्तीफा की प्रक्रिया खत्म होने दीजिए, विधानसभा अध्यक्ष का निर्णय आने दीजिए। इसके बाद हमारी पार्टी के नेता विचार-विमर्श करेंगे और निर्णय करेंगे। भाजपा एक राष्ट्रीय पार्टी है और केंद्रीय नेतृत्व इस पर विचार करके निर्णय करेगा। उधर तेलंगाना के दौरे पर गए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कर्नाटक में सरकार के गिरने पर भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनने का संकेत दे दिया है।

येदियुरप्पा का है सपना
मई 2018 में भाजपा के पास बहुमत नहीं था। लेकिन कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा 105 विधायकों के विधायकों के बूते सरकार बनाने का दावा पेश कर चुके थे। बाद में बहुमत साबित न कर पाने की स्थिति देखकर उन्हें पद छोड़ना पड़ा था, लेकिन येदियुरप्पा ने एलान कर दिया था कि कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली सरकार कुछ दिन की मेहमान है। येदियुरप्पा के ऊपर इसके बाद आपरेशन कमल चलाने, राज्य सरकार को अस्थिर करने के आरोप लगे। विधायकों के खरीद-फरोख्त की खबरें भी आई। यहां तक कि येदियुरप्पा विधायकों का एक दल लेकर गुड़गांव में भी आ गए थे। दरअसल, राज्य का जल्द से जल्द मुख्यमंत्री बनना येदियुरप्पा का मिशन और सपना दोनों है।

बीएस येदियुरप्पा 76 साल (जन्म 27 फरवरी 1943) के हो चुके हैं। तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। इसलिए उन्हें अधिक से अधिक एक बार और सीएम बनने का चांस मिल सकता है। वह इस इस इच्छा को पूरा करना चाहते हैं।

क्यों व्यग्र हैं येदियुरप्पा?
भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने पार्टी की सक्रिय राजनीति के लिए 75 साल अपने नेताओं की उम्र तय कर दी है। इस पैमाने का पालन करते हुए केंद्रीय नेतृत्व ने पार्टी के मार्ग दर्शक मंडल के सदस्य लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन समेत तमाम वरिष्ठ नेताओं को टिकट नहीं दिया। इस मामले में केवल पिछली बीएस येदियुरप्पा ही अपवाद रहे। पार्टी ने पिछले साल कर्नाटक विधानसभा चुनाव न केवल येदियुरप्पा के नेतृत्व में लड़ा, बल्कि चुनाव के बाद उन्हें सरकार बनाने के लिए आगे बढ़ने को कहा। लोकसभा चुनाव 2019 में भी येदियुरप्पा की सलाह को सम्मान मिला, सीटें भी ठीक-ठीक आई। ऐसे में येदियुरप्पा जानते हैं कि उनके पास अभी अवसर है, लेकिन आगे के लिए समय कम है। लिहाजा वह समय रहते सबकुछ ठीक कर लेना चाहते हैं। कर्नाटक भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का भी मानना है कि सत्ता में आने पर सब ठीक हो जाता है। बीएस येदियुरप्पा भी इसे भली भांति समझते हैं।

क्या पूरा हो पाएगा येदियुरप्पा का सपना?
इस बार कदाचित बच गई तो कुछ महीने बाद जरूर एचडी कुमारस्वामी सरकार गिर सकती है। 13 विधायकों ने इस्तीफा दिया है और इसमें सबसे अधिक 10 विधायक कांग्रेस के हैं। भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी इसके लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं तो सिद्धारमैया के अनुसार येदियुरप्पा के नेतृत्व आपरेशन लोटस चल रहा है। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने सरकार बचाने के लिए जी जान लगा दिया है। पहले भी डीके शिवकुमार और मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने मिलकर सरकार को संकट से बचाया था। मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी विशेष विमान से अमेरिका से दिल्ली आने के बाद बंगलूरू रवाना हो चुके हैं। एचडी कुमारस्वामी और कांग्रेस के नेता ने विधायकों की बैठक बुलाई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल भी इस बैठक में रहेंगे। समय गंभीर है और येदियुरप्पा के सपने को पंख लगने के आसार हैं।

 

 
 

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