देहरादून में IMA के पास 20 एकड़ जमीन पर घमासान, BJP और कांग्रेस आई आमने-सामने

देहरादून में IMA के पास 20 एकड़ जमीन पर घमासान, BJP और कांग्रेस आई आमने-सामने

देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के पास स्थित करीब 20 एकड़ जमीन को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है. यह जमीन लगभग दो दशक पहले तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में एक अल्पसंख्यक शिक्षा ट्रस्ट को आवंटित की गई थी. उस समय यहां मुस्लिम विश्वविद्यालय या इस्लामी शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने की चर्चा चल रही थी. अब इसी मामले को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है.

भूमि को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर आवासीय प्लॉट में बेचे जा रहे

हाल ही में जिला प्रशासन की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संबंधित भूमि को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर आवासीय प्लॉट के रूप में बेचे जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है. इस पर सवाल उठाते हुए सरकार ने भूमि उपयोग (लैंड यूज) में कथित अनियमितताओं की जांच तेज कर दी है. साथ ही आईएमए जैसे संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठान के निकट इस तरह की गतिविधियों को सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर बताया जा रहा है.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रकरण को गंभीर बताते हुए कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष पहले भी मुस्लिम यूनिवर्सिटी जैसे मुद्दों को आगे बढ़ाता रहा है और यदि उन्हें अवसर मिलता तो वे उसी दिशा में काम करते. मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जमीन को सरकार अपने अधीन लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर सकती है.

बीजेपी  के अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे को कांग्रेस की नीतियों से जोड़ते हुए इसे सुरक्षा और पारदर्शिता का प्रश्न बताया है. उनका कहना है कि आईएमए के आसपास किसी भी प्रकार की अनियमित गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

बीजेपी लंबे समय से सत्ता में, तब इस आवंटन को निरस्त क्यों नहीं किया?

कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है. पार्टी नेताओं का कहना है कि यह पुराना मामला है और बीजेपी इसे राजनीतिक लाभ के लिए उछाल रही है. कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब बीजेपी लंबे समय तक सत्ता में रही, तब इस आवंटन को निरस्त क्यों नहीं किया गया?

पार्टी ने आरोप लगाया कि आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश की जा रही है. कुल मिलाकर, देहरादून की यह जमीन अब प्रशासनिक जांच के साथ-साथ सियासी संग्राम का भी केंद्र बन गई है और आने वाले समय में इस पर और बयानबाजी तेज होने के आसार हैं.


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