सुंदर होना किसी व्यक्ति के चरित्र व व्यवहार का परिचायक नही- आचार्य ब्रहमानंद सरस्वती

सुंदर होना किसी व्यक्ति के चरित्र व व्यवहार का परिचायक नही- आचार्य ब्रहमानंद सरस्वती
  • रणदेवी मे कथा सुनाते ब्रहमनंद सरस्वती

नकुड 3 दिसबंर इंद्रेश। रणदेवी मे चल रही भगवद कथा मे कथा आचार्य ब्रहमानंद सरस्वती जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओ का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान ने बाल लीलाओ के माध्यम से उन दुरात्माओ को भवसागर पार करा दिया जो कंस की संगति में पापक्रमों मे लिप्त हो गयी थी।

आचार्य ब्रहमानंद सरस्वती जी ने पूतना का जिक्र करते हुए कहा कि यह जरूरी नंही है कि जिसका चेहेरा सुंदर हो उसका अंतर्मन भी सुंदर होगा। ओर जिसका चेहरा मोहरा अच्छा न लगता हो वह अंदर से भी डरावना ही हो। मोर का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि मोर देखने मे सुंदर है। पंरुत उसका आहार विषैले संाप होते है। कंस ने पूतना को श्री कृष्ण को मारने का कार्य सोंपा था। राक्षसी प्रवृति मे लिप्त होने के कारण पूतना की का चेहेरा व वेश भूषा डरावनी थी। पंरतु जब वह श्री भगवान को मारने के लिये गयी तो उसने अपने अपना अत्यंत सुंदर व मनोहारी रूप बनाया। जिससे वृंदावन के लोग उसे राजसी कन्या समझने लगे।

पूतना ने तीन माह के सुंदर बालक श्री कृष्ण को देखा तो वह उस पर मुग्ध थी। उसने उन्हे उठाया तथा अपने उस स्तन से दूध पिलाया जिस पर विष का लेप किया गया था। परंतु श्री भगवान ने पूतना के वात्सल्य व मां के रूप मे दूध पिलाने के उसके कार्य के कारण उसे भव सागर से तार दिया। जब उसके प्राण पखेरू उड गये तो वृंदवनवासी तब समझ पाये कि पूतना एक राक्षसी थी। उन्होंने तृणासूर, व वकासुर की कथा का भी सुंदर वर्णन किया। भगवान श्री कृष्ण की बाललीलाओ को सुनकर दर्शक भावविभोर हो गये।

इस मौके पर कथा स्थल रामदूत कालेज मे चल रहे श्री सूर्य पंचायतन महायज्ञ मे सौ कुंडी यज्ञ मे सैंकडो पुरोहितो ने आहुतियां दी । क्षेत्र के विभिन्न गांवो से आ रहे हजारो श्रद्धालुओ ने श्री सूर्य पंचायतन यज्ञ स्थल की परिक्रमा कर अपने आपको धन्य बनाया। इस मौके पर विधायक देवेंद्र निम, कथा व महायज्ञ के आयोजक चै0 हरिपालसिंह , सुभाष चैधरी देहात मंडल के पूर्व अध्यक्ष सुभाष चैधरी पवनसिंह रावल, संजीव चैधरी, राजपालसिंह प्रधान, राजेश त्यागी आदि उपस्थित रहे।