अनुच्छेद-370 : सुप्रीम कोर्ट का सवाल, क्या यूएन भारत के संविधान संशोधन पर रोक लगा सकता है?

 

खास बातें

  • अनुच्छेद-370 को लेकर दायर याचिका पर जल्द सुनवाई से कोर्ट का इनकार।
  • संयुक्त राष्ट्र को मिला पाक का पत्र।
  • याचिकाकर्ता वकील एमएल शर्मा ने जल्द सुनवाई की मांग की।
  • संयुक्त राष्ट्र का शीर्ष नेतृत्व भारत और पाकिस्तान से विभिन्न स्तर पर संपर्क में है।

राष्ट्रपति आदेश के जरिए अनुच्छेद-370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने वृहस्पतिवार को जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया।

याचिकाकर्ता वकील एमएल शर्मा ने जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की। पीठ ने सवाल किया कि क्या याचिका की खामियां दूर की जा चुकी हैं। जवाब में शर्मा ने कहा कि खामियां दूर की जा चुकी हैं। सुनवाई के लिए 12 या 13 अगस्त मुकर्रर की जाए।

शर्मा ने पीठ से कहा कि उन्हें इस बात की आशंका है कि पाकिस्तान व कश्मीरी लोग इस मसले को संयुक्त राष्ट्रसंघ में ले जा सकते हैं। इस पर जस्टिस रमण ने कहा कि अगर वे संयुक्त राष्ट्रसंघ चले गए तो क्या संयुक्त राष्ट्रसंघ भारत द्वारा किए गए संविधान संशोधन पर रोक लगा सकता है? जस्टिस रमण ने शर्मा से कहा कि वह अपनी ऊर्जा सुनवाई के दौरान पेश करने के लिए बचा कर रखें।

अपनी याचिका में शर्मा ने कहा है कि अनुच्छेद-370 को हटाने की अधिसूचना, संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। साथ ही याचिका में कहा गया कि इस अनुच्छेद को हटाने के लिए सरकार ने जो संशोधन किए हैं वे असंवैधानिक हैं।

आरोप लगाया गया है कि सरकार ने मनमाने व असंवैधानिक तरीका अपनाते हुए इसे अंजाम दिया है। शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार की है कि इस अधिसूचना को असंवैधानिक करार दिया जाए और इसे निरस्त कर दिया जाए।

मालूम हो कि गत सोमवार को राष्ट्रपति आदेश के जरिए जम्मू एवं कश्मीर को मिले विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया गया था, साथ ही पूर्व में राष्ट्रपति आदेश के जरिए तमाम बदलावों को निरस्त कर दिया गया। इसके तहत अनुच्छेद-35ए भी स्वत: खत्म हो गया।

 
 

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