पुणे में पुलिस और वारकरी भक्तों के बीच हुई बहस, लाठीचार्ज का लगा आरोप; कमिश्नर ने नकारा

पुणे में पुलिस और वारकरी भक्तों के बीच हुई बहस, लाठीचार्ज का लगा आरोप; कमिश्नर ने नकारा

पिंपरी चिंचवाड़ पुलिस कमिश्नर विनय कुमार चौबे ने बताया कि कुछ स्थानीय युवकों ने पालकी जुलूस में जबरन घुसने की कोशिश की। जिसको लेकर पुलिस के साथ उनकी कहासुनी हो गई। हालांकि पुलिस ने उनके खिलाफ कोई लाठीचार्ज या बल का प्रयोग नहीं किया।

पुणे। महाराष्ट्र में बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला पुणे के अलंदी शहर का है, जहां पर रविवार को एक जुलूस के दौरान पुलिस और वारकरी भक्तों के बीच बहस हो गई। जिसके बाद विपक्षी दलों ने पुलिस पर लाठीचार्ज का आरोप लगाया। हालांकि, पुलिस ने लाठीचार्ज के आरोप को सिरे से खारिज कर दिया।

क्या पुलिस ने किया लाठीचार्ज?

पिंपरी चिंचवाड़ पुलिस कमिश्नर विनय कुमार चौबे ने बताया कि कुछ स्थानीय युवकों ने पालकी जुलूस में जबरन घुसने की कोशिश की। जिसको लेकर पुलिस के साथ उनकी कहासुनी हो गई। हालांकि, पुलिस ने उनके खिलाफ कोई लाठीचार्ज या बल का प्रयोग नहीं किया।

उन्होंने बताया कि पिछले साल के जुलूस के दौरान भीड़भाड़ थी और उसी को देखते हुए इस बार आगंतुकों की संख्या को सीमित करने का फैसला किया गया।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना तब हुई जब वारकरी भक्तों ने आलंदी में संत ज्ञानेश्वर महाराज के मंदिर में एक जुलूस के दौरान प्रवेश करने की कोशिश की। वार्षिक शोभायात्रा रविवार की सुबह आलंदी से शुरू हुई जिसमें राज्य के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा और पुलिस पर लाठीचार्ज का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह हिंदुत्व सरकार है। वारकरों ने आज पुलिस के डंडे खाए। कल बंदूकों का सामना करेंगे।