अंजना ओम कश्यप पत्रकारिता की सभी सीमायें लांघ दी तुमने!

 
Anjana Om Kahyap

कार्यक्षेत्र कोई भी हो सभी की अपनी सीमाएं निर्धारित है। हां वो बात दीगर है कि किन्ही कार्यक्षेत्रो की घोषित सीमायें होती है और कुछ की अघोषित, लेकिन सीमायें सभी की है। पत्रकारिता एक ऐसा पेशा है जिसकी सीमाएं अघोषित है, लेकिन सीमाएं जरुर है। आप एक सीमा के अन्दर रहकर ही पत्रकारिता कर सकते है।

चूँकि यह पेशा समाज से प्रत्यक्ष रूप से जुडा होता है इसलिए पत्रकारिता की सीमाँए सरकार या किसी एजेंसी द्वारा निर्धारित करना लोकतंत्र को बेडियो में जकड़ने के  रूप में देखा जाता है। लेकिन अंजना ओम कश्यप की पत्रकारिता को देखेते हुए यह आवश्यक लगने लगा है कि इलेक्ट्रोनिक पत्रकारिता की सीमायें भी अवश्य निर्धारित की जानी चाहियें।

पत्रकारिता के नाम पर किसी के व्यतिगत, पारिवारिक, सामाजिक चीर हरण का लाईसेंस नहीं दिया जाना चाहिए। सच्चाई समाज के सामने लाना पत्रकार का कर्तव्य है। लेकिन ऐसा करते समय ध्यान यह रखा जाता है कि रिपोर्टिंग व्यक्तिगत न हो, एकपक्षीय न हो! रिपोर्टिंग करते समय आप रिपोर्टर रहे जज न बने।

अंजना ने शुक्रवार को स्टूडियो में बैठकर साक्षी-अजितेश को लाइव किया, इससे किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन अपने शो के दौरान जिस तरह साक्षी के पिता को हॉट लाइन पर लिया वो निश्चत रूप से अति आपत्ति जनक था। यह सीधे-सीधे साक्षी के पिता के व्यतिगत, पारिवारिक, सामाजिक चरित्र हनन का मामला है। अंजना ने ऐसा कर निश्चित रूप से साक्षी के पिता की व्यतिगत, पारिवारिक व सामाजिक प्रतिष्ठा की धज्जियाँ उडाई। इसकी इजाजत अंजना को किस ने दी? क्या भारतीय संविधान यह इजाजत देता है कि पुरे देश के सामने किसी व्यक्ति का व्यक्तिगत, सामाजिक और पारिवारिक चीर हरण किया जाए?

अंजना क्या अपने आप को इस देश के संविधान से ऊपर समझ बैठी है? साक्षी-अजितेश ने प्रेम विवाह कर लिया भारतीय संविधान उन्हें इसकी इजाजत देता है। यदि साक्षी के परिवार की तरफ से साक्षी को कोई समस्या थी तो इसके समाधान के लिए कानून है, जो अपना कार्य करता और करेगा भी। अंजना शायद यह भूल बैठी है कि इस देश में एक न्याय प्रणाली भी है। ठीक है पत्रकार होने के नाते अंजना इस मामले पर रिपोर्टिंग कर सकती है यह उसका अधिकार है और यदि कोई समस्या है तो करना भी चाहिए। अंजना साक्षी-अजितेज से लाइव बात कर सकती है इसमें भी कोई आपात्ति नहीं। लेकिन स्टूडियो में बैठकर आप जो सरपंच बन गयी वो वास्तव में आपके कार्यक्षेत्र से बहुत बाहर का मामला है। ऐसा करने के लिए देश का संविधान आपको इजाजत नहीं देता।

मैं हतप्रभ था शो के दौरान किस तरह अंजना ने साक्षी के पिता से बात की। यंहा तक की गवाहों तक को हॉट लाइन पर लेने का प्रयास किया। निश्चित रूप से अंजना ने पत्रकारिता की सभी अघोषित सीमाओं को लांघा है। इसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। साक्षी के पिता निश्चित ही सुद्रढ़ मानसिकता के व्यक्ति है, यदि कोई सामान्य व्यक्ति होता तो अंजना द्वारा इस तरह किये गए व्यक्तिगत, सामाजिक और पारिवारिक चीर हरण के बाद आत्महत्या कर चूका होता।

अंजना द्वारा किये साक्षी के पिता के व्यक्तिगत, सामाजिक व पारिवारिक चीर हरण के बाद गोपामऊ (हरदोई) से भाजपा के दलित विधायक श्याम प्रकाश ने अंजना की बेटी के लिए अपने बेटे का विवाह प्रस्ताव भेजा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि स्टूडियो में बैठकर सामाजिक विषयों पर बड़ी-बड़ी डींगे हांकने वाली अंजना क्या एक दलित से अपनी बेटी का विवाह प्रस्ताव स्वीकार करती है या नहीं?

 

लेखक, दिग्विजय त्यागी समसामयिक, राजनीतिक विषयों के जानकार व 24 सिटी न्यूज़ के प्रबंध संपादक है।

 

 
 
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