पाक: अनुच्छेद 370 हटाने से गुस्साए दो लोगों ने महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा तोड़ी, गिरफ्तार

 
खास बातें

  • झुंझलाहट से भरे पाकिस्तानी नागरिकों ने उठाया कदम, पुलिस ने गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे डाला
  • अनुच्छेद 370 को लेकर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कोई खास तवज्जो नहीं मिल रही
  • पाक के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और जम्मू-कश्मीर से लगती सीमा पर दर्जनभर आतंकी शिविर फिर सक्रिय
  • खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 150 से ज्यादा आतंकी भारत में घुसपैठ के लिए तैयार हैं

पाकिस्तान के लाहौर के किले में शनिवार को महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने का मामला सामने आया है। इस प्रकरण में स्थानीय पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है। बता दें महाराजा की इस नौ फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण लाहौर किले में जून में किया गया था

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पुलिस ने इस मामले के दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर ईशनिंदा कानून के तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा वापस लिये जाने को लेकर आरोपी दोनों व्यक्ति क्रोधित थे। महाराजा रणजीत सिंह सिख साम्राज्य के नेता थे, जिन्होंने 19 वीं शताब्दी में उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तर में शासन किया था।

गिरफ्तार किए गए आरोपी पाकिस्तान में मौलाना खैम रिज्वी के तहरीक-लब्बैक नाम के संगठन से जुड़े बताए गए हैं। उधर, इस घटना से अचंभित किले की देखरेख का जिम्मा निभाने वाली अर्ध सरकारी संगठन वाल्ड सिटी ऑफ लाहौर अथॉरिटी ने ईद के बाद प्रतिमा को जल्द से जल्द ठीक कराने की बात कही है।

वाल्ड सिटी ऑफ लाहौर अथॉरिटी की प्रवक्ता तानिया कुरैशी ने पीटीआई से कहा कि यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को होने से रोकने के लिए किले की सुरक्षा बढ़ाई जाएगी। प्रतिमा को अगले हफ्ते तक दोबारा ठीक करा लिया जाएगा। एक बार सबकुछ पहले जैसा हो जाने पर इसे आम लोगों के देखने के लिए खोल दिया जाएगा।

पीओके में जुटे 150 आतंकी
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35-ए खत्म होने के बाद पाकिस्तान लगातार भारत में अशांति फैलाने की साजिश रच रहा है। खबर है कि पाक के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और जम्मू-कश्मीर से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर दर्जन भर आतंकी शिविरों को फिर सक्रिय कर दिया गया है। करीब 150 से ज्यादा आतंकी भारत में घुसपैठ के लिए तैयार हैं।

दरअसल, फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की मई 2019 तक की समयसीमा देखते हुए लगभग पूरी तरह बंद हुए आतंकी शिविरों में पिछले सप्ताह के दौरान सक्रियता बढ़ गई है। शीर्ष खुफिया सूत्रों के मुताबिक पीओके के कोटली, रावलकोट, बाघ और मुजफ्फराबाद में आतंकी शिविर फिर सक्रिय हो गए हैं। इसे देखते हुए भारतीय सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नहीं मिल रही कोई खास तवज्जो

भारत सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा हटाने को लेकर संयुक्त राष्ट्र से लेकर अमेरिका, चीन, रूस जैसे देशों तक का दरवाजा खटखटा चुके पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कोई खास तवज्जो नहीं मिल रही है।

राजनयिक सूत्रों के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा कश्मीर के मौजूदा हालात देखते हुए पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद या घुसपैठ ना करने को कहा है। वहीं भारत ने इसे अपना आंतरिक मामला बताया है। ऐसे में पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कहीं से भी तवज्जो नहीं मिल रही है।

वहीं, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान, शीर्ष पाकिस्तानी नेता और उसके राजनियक लगातार अमेरिकी सांसदों और वरिष्ठ अधिकारियों से मिलकर कह रहे हैं कि उनके मध्यस्थता न करने पर युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है।

बता दें भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने शुक्रवार को कहा था कि इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष स्थिति तनावपूर्ण दिखाने की कोशिश कर रहा है। यह ध्यान आकर्षित करने का पैंतरा है। समय आ गया है पाकिस्तान नई वास्तविकता का सामना करे और भारत के आंतरिक मामलों में दखल देना बंद करे।

इमरान संसद में दे चुके गीदड़भभकी

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने हाल ही में संसद के संयुक्त सत्र में कहा था कि भारत में अगर पुलवामा जैसा हमला होता है तो इसके लिए इस्लामाबाद जिम्मेदार नहीं होगा। इमरान के बयान में प्रत्यक्ष तौर पर जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा तथा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के हैंडलर्स को प्रशिक्षण शिविर और लॉन्च पैड दोबारा सक्रिय करने के लिए खुली छूट दी गई है।

खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लश्कर, जैश और तालिबान के लगभग 150 आतंकी कोटली के निकट फागूश और कुंड शिविरों तथा मुजफ्फराबाद क्षेत्र में शवाई नल्लाह और अब्दुल्ला बिन मसूद शिविरों में इकट्ठे हुए हैं। जैश सरगना मसूद अजहर का भाई इब्राहिम भी पीओके में देखा गया है।

 
 
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