‘सवाल करने दीजिए नहीं तो…’ इस मुद्दे पर सदन में स्पीकर ओम बिरला से भिड़ गए धर्मेंद्र यादव
उत्तर प्रदेश की आजमगढ़ सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव और लोकसभा स्पीकर के बीच लोकसभा में नोंक-झोंक देखने को मिली. सपा सांसद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डॉलर के मुकाबले रुपये गिरने वाले बयान का हवाला देते हुए सवाल कर रहे थे तभी स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें टोक दिया, जिसके बाद धर्मेंद्र यादव भड़क गए और कहा कि आप सवाल करने दीजिए नहीं तो मैं छोड़ देता हूं.
धर्मेद्र यादव जब अपनी बात कहने के लिए सदन में उठे तो उन्होंने वित्त राज्य मंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि “मैं वित्त राज्य मंत्री का जवाब ध्यान से सुन रहा था. हम अपनी बात नहीं कह रहे हैं लेकिन, पूरा देश प्रधानमंत्री की बात सुनता भी और मानता भी है. मैं आज इस मौके पर प्रधानमंत्री ने जो कहा था कि रुपये के साथ देश की साख भी गिरती है..
स्पीकर ओम बिरला से भिड़े धर्मेंद्र यादव
इतना कहते ही लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें टोक दिया और कहा कि अब आप इसे रिपीट क्यों कर रहे हो..? इस पर सपा सांसद भड़क गए और कहा कि “अध्यक्ष जी सवाल करने दीजिए नहीं तो मैं छोड़ दे रहा हूं. मैं छोड़ दे रहा हूं..” तो ओम बिरला ने जवाब दिया- ‘छोड़ दीजिए..” इस पर सपा सांसद ने कहा कि आप सवाल करने ही नहीं दे रहे तो.. स्पीकर ने कहा आप सवाल करिए..
रुपया गिरने पर सरकार से पूछा तीखा सवाल
इसके बाद धर्मेंद्र यादव ने सीधे वित्त मंत्री की ओर देखते हुए पूछा कि माननीय मंत्री जी क्या आप आज प्रधानमंत्री की इस बात पर कायम है कि प्रधानमंत्री की साख रुपये के साथ गिर रही है या नहीं? जो 60 रुपये का था वो अब 94 और 95 रुपये तक का हो गया है. उसका स्पष्ट जवाब दीजिए. क्योंकि चुनाव जीतने के लिए आप लोगों की बातें कुछ होती है और नीतियां बनाने के लिए बातें दूसरी होती हैं.
धर्मेद्र यादव ने का कि वित्त मंत्री ने कुछ देशों का उदाहरण दिया है. दिन रात सरकार के लोग भाषण दे रहे है कि हमारी अर्थव्यवस्था दोगुना हो गई. तीन नंबर पर पहुंची चार नंबर पहुंची…और जब अर्थव्यवस्था के लिए आप जवाब देते हैं रुपये के मुकाबले पर तो आप उदाहरण के तौर पर दक्षिण कोरिया ‘वोन’ और थाई ‘बाट’ कहते हैं फिलीपिंस पैसों को कहते हैं.
मैं पूछना चाहता हूं कि वो दिन कब आएगा हमारे देश का जब हमारा मुकाबला डॉलर से होगा.. पॉन्ड से होगा..यूरो से होगा.. जिस तरह चौथी अर्थव्यवस्था की बात करते हो विकसित देशों से आगे हम कब बढ़ेंगे?
