पल्लवी पटेल के साथ अलायंस फेल, अब बसपा का मिलेगा साथ! यूपी में क्या होगी ओवैसी की पॉलिटिक्स?
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए एक साल से भी कम का वक्त बचा है. इस बीच राज्य में भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अपनी-अपनी रणनीतियां बनाने में जुट गए हैं. सपा और कांग्रेस जहां भारतीय राष्ट्रीय समावेशी विकास गठबंधन यानी इंडिया अलायंस के परचम तले चुनाव लड़ सकते हैं तो वहीं बीजेपी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) और निर्बल भारतीय शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) के साथ मैदान में उतरेगी. उधर, बसपा अभी भी अकेले ही मैदान में उतरने का मूड बना रही है.
इन सबके बीच हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) भी यूपी चुनाव में पूरे दमखम के साथ उतरने की तैयारी कर रही है. अगर पार्टी चुनाव में उतरती है तो यह उसका चौथा चुनाव होगा.
वर्ष 2017, 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद एआईएमआईएम ने कुछ क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर एक मोर्चा बनाया था. यह मोर्चा सपा चीफ के पीडीए फॉर्मूले के मुकाबले के तौर पर पीडीएम बनाया गया था. जिसमें पिछड़ा, दलित मुसलमान की बात की गई थी. इस मोर्चे ने 25 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे. हालांकि इसमें AIMIM का एक भी प्रत्याशी नहीं था.
अब 2027 के चुनाव के लिए दावा है कि एआईएमआईएम, बसपा के साथ अलायंस कर सकती है. ऐसे में यह सवाल उठ रहे हैं कि राज्य में गठबंधन करने के लिए आतुर AIMIM का इस संदर्भ में पुराना इतिहास क्या रहा है? इसके साथ ही यह भी बात हो रही है कि जो एआईएमआईएम, बसपा के हाथी की सवारी कर राज्य में एंट्री की कोशिश में उसकी क्या स्थिति है?
बता दें AIMIM ने वर्ष 2017 के यूपी विधानसभा का चुनाव 38 सीटों पर लड़ा था. 37 सीटों पर पार्टी की जमानत जब्त हो गई थी.इस चुनाव में AIMIM को 2,04,142 वोट मिले थे. AIMIM ने जिन सीटों पर चुनाव लड़ा था, वो मुख्यतौर पर पश्चिम उत्तर प्रदेश की मुस्लिम बहुल सीटें थीं. उधर, 2022 में एआईएमआईएम ने 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे सिर्फ .49% वोट मिले थे.
2024 के चुनाव कितना कारगर रहा ओवैसी का अलायंस?
2024 चुनाव में पीडीएम मोर्चा बनाने वाली एआईएमआईएम ने अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा लेकिन उसके साथ का फायदा अन्य दल को भी नहीं मिला. इस चुनाव में अपना दल कमेरावादी की नेता पल्लवी पटेल ने प्रत्याशी उतारे और उन्हें कुल मतदान में से सिर्फ .4 फीसदी वोट मिले और नतीजा सिफर रहा. ऐसे में यह स्पष्ट है कि एआईएमआईएम के साथ का लाभ अपना दल कमेरावादी को नहीं हुआ.
बसपा के साथ कितना फिट होंगे ओवैसी?
वहीं बसपा की बात करें तो लोकसभा चुनाव में उसे कुल वोट का 9.46 फीसदी मत मिले थे. हालांकि लोकसभा में उसका खाता नहीं खुला था. विधानसभा में भी बसपा का सिर्फ 1 ही विधायक है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो अगर एआईएमआईएम और बसपा साथ आते भी हैं तब भी किसी बड़े जादू की उम्मीद फिलहाल नहीं है.
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यूपी में एआईएमआईएम की आगामी रणनीति क्या होगी और वह धरातल पर कितनी मजबूती के साथ उतरेगी.
