सपा विधायक विजय सिंह गोंड का निधन, अखिलेश यादव ने जताया शोक, यूपी की आखिरी विधानसभा सीट से 8 बार MLA बने थे

सपा विधायक विजय सिंह गोंड का निधन, अखिलेश यादव ने जताया शोक, यूपी की आखिरी विधानसभा सीट से 8 बार MLA बने थे

सोनभद्र: सोनभद्र जिले में समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता और यूपी की आखिरी विधानसभा सीट दुद्धी से विधायक विजय सिंह गोंड का निधन हो गया है। लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई में इलाज के दौरान उनका निधन हुआ। सपा नेता अवधनारायण यादव ने अपने विधायक के निधन की पुष्टि की है। लंबे समय से बीमार चल रहे विजय सिंह गोंड की दोनों किडनियां खराब हो गई थीं, जिसके चलते उन्हें एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया था। गोंड 71 साल के थे। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया जाएगा।

अखिलेश यादव ने जताया शोक

विजय सिंह गोंड के निधन पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शोक जताया है। निधन की जानकारी मिलते ही अखिलेश यादव पीजीआई पहुंचे। उन्होंने कहा कि विनय गोंड हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने हमेशा से ही आदिवासियों की सेवा की। जनता भी उन्हें बहुत प्यार करती थी। इसलिए उन्हें हर बार सेवा का मौका दिया था।

विजय सिंह गोंड को ‘पितामह’ की दी जाती है संज्ञा 

आदिवासी समाज की आवाज बुलंद करने वाले अग्रणी नेताओं में शुमार विजय सिंह गोंड के निधन से सोनभद्र सहित आसपास के इलाकों में शोक की लहर है। दुद्धी विधानसभा सीट को आदिवासी राजनीति का मजबूत गढ़ माना जाता है, जहां विजय सिंह गोंड को ‘पितामह’ की संज्ञा दी जाती रही है। उत्तर प्रदेश की 403वीं और अंतिम विधानसभा सीट दुद्धी जनजाति के लिए आरक्षित है और इस सीट पर उनका लंबे समय तक वर्चस्व रहा।

8 बार चुने गए थे विधायक

विजय सिंह गोंड कुल आठ बार विधायक चुने गए। अलग-अलग दलों से सात बार लगातार जीत दर्ज करने वाले गोंड दो बार आरक्षण के कारण स्वयं चुनाव नहीं लड़ सके, लेकिन उन्हीं के समर्थन से प्रत्याशी विजयी हुए। वर्ष 2017 और 2022 के चुनावों में उन्हें मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा, जबकि 2024 के उपचुनाव में उन्होंने फिर से विधायक की कुर्सी हासिल की।

गोंड 2024 के उपचुनाव में दुद्धी से सपा उम्मीदवार के तौर पर विधायक चुने गए थे। उस समय के MLA रामदुलार गोंड को एक नाबालिग से रेप के मामले में 25 साल की जेल की सज़ा होने के बाद उपचुनाव कराना पड़ा था। 1980 में अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत करते हुए, गोंड पहले दुद्धी से कांग्रेस MLA चुने गए थे। 1989 में इंडिपेंडेंट के तौर पर विधायक बने और बाद में 1991 और 1993 में जनता दल का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 1996 और 2002 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की।