मृत्यु पश्चात संस्कारों में की जाने वाली आपाधापी जीवन कलह का मुख्य कारण : राघवेंद्र स्वामी

मृत्यु पश्चात संस्कारों में की जाने वाली आपाधापी जीवन कलह का मुख्य कारण : राघवेंद्र स्वामी
  • सहारनपुर में जनचेतना समिति के कार्यक्रम में सम्मानित करते अतिथिगण।

सहारनपुर [24CN]। स्वामी राघवेंद्र ने कहा कि भौतिकवादी दौड़-धूप और तेजी से परिवर्तित सामाजिक परिदृश्य में जहां व्यक्ति सबसे आगे निकलने की दौड़ और सबको पीछे छोडऩे की होड़ में उलझ गया है, यहां तक कि अपने परिजनों की मृत्यु के पश्चात परिवार द्वारा धर्म ग्रंथों के अनुसार संपन्न किए जाने वाले संस्कारों में भी आपाधापी मचाने से बाज नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा की अंतिम संस्कार के बाद किए जाने वाले क्रिया कर्म दिन प्रतिदिन विलुप्त होते जा रहे हैं, और धर्म ग्रंथों के अनुसार संपादित किए जाने वाले मृत्यु पश्चात संस्कार भी एक औपचारिकता सी बन गए हो।

स्वामी राघवेंद्र आज सामाजिक संगठन जनचेतना मिशन सहारनपुर द्वारा एक होटल के सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा इन संस्कारों का दिन प्रतिदिन विलुप्त होना ही मनुष्य के जीवन की कलह का मुख्य कारण बन गया है। जनचेतना मिशन द्वारा मृत्यु पश्चात होने वाले संस्कारों में मची आपाधापी बना रही जीवन को दु:खव्यापीÓ विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी बतौर प्रेरक एवम मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए स्वामी राघवेंद्र ने कहा इसी कारण से अधिकतर परिवारों में पित्र दोष लगता है जिसकी वजह से समाज में तलाक, निसंतानता, अपंग संतान का होना, धन का विनाश होना, संतान का आज्ञाकारी ना होना, इत्यादि दोषों के कारण गृह क्लेश का अनुपात दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था के अध्यक्ष सत्येंद्र आहूजा ने कि कहा कि हमारे पूर्वज उन परिवारों में जाना पसंद नहीं करते थे, जहां परिजनों की अंत्येष्टि धर्म ग्रंथों के अनुसार निश्चित समय पर नहीं होती थी। विचार गोष्ठी का प्रारंभ करते हुए संस्था के संस्थापक एवं चेयरमैन गुलशन नागपाल ने कहां की बड़ी हैरानी की बात है, मृत्यु पश्चात संस्कारों को धर्म ग्रंथों के अनुसार संपादित करना तो बहुत दूर की बात, लोग परिवार में मृत्यु होने पर मदिरा सेवन का भी परहेज नहीं कर पाते। उन्होंने वर्तमान सामाजिक परिवेश में खेद व्यक्त करते हुए कहा कि कभी-कभी मृत्यु पश्चात किए जाने वाले परिवार के व्यवहार को देखकर प्रतीत होता है जैसी पुत्र अपने माता-पिता की मृत्यु की इंतजार कर रहे थे और उनके इंतजार की घडिय़ां समाप्त हो गई हों।

विचार गोष्ठी में शीतल टंडन, विरेंद्र भारती, रवि बब्बर द्वारा भी विचार व्यक्त किए गए। कार्यक्रम में संस्था द्वारा स्वामी राघवेंद्र स्वामी को सम्मान चिन्ह एवं अंग वस्त्र द्वारा सम्मानित किया गया स कार्यक्रम मे नए सदस्यों के रूप में सुशील सीडाना, बलजीत सिंह चावला, रविंद्र सिंह सैनी, आशु जेटली, का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में शिव चंद्र गुलाटी, सुनील मखीजा प्रमोद सेठ, आशु सिंधु, मुकेश सेठ, रवि जुनेजा, विकास खरबंदा, वीरेंद्र भारती, रवि बब्बर, शीतल टंडन, राजीव धारिया, शिव अरोड़ा, प्रताप सिंह, संजय अरोड़ा, निधि अरोड़ा, नीलम नागपाल, रमन जुनेजा ममता भारती, गोल्डी जुनेजा, विशाखा खरबंदा, छाया गुलाटी इत्यादि विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन संस्था के संयोजक सरदार गोविंदर सिंह ने किया।