‘फॉर्म-7 में जितने नाम सब PDA हैं’, अखिलेश यादव ने साधा निशाना, कहा- कयामत तक लड़ेंगे लड़ाई

‘फॉर्म-7 में जितने नाम सब PDA हैं’, अखिलेश यादव ने साधा निशाना, कहा- कयामत तक लड़ेंगे लड़ाई

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एसआईआर की प्रक्रिया में फॉर्म-7 को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि फॉर्म-7 में जितने भी नाम दिखे हैं वो सब पीडीए हैं. जिनमें दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक शामिल हैं. उन्होंने पीडीए प्रहरी को सावधान करते हुए निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए और कहा कि वो इसकी लड़ाई जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे.

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लंबी पोस्ट करते हुए दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों व जातियों का जिक्र करते हुए दावा किया कि जितने भी नाम काटने की कोशिशें हो रही हैं उन सबकी कहानियां जाति से जाकर ही मिलती है. लेकिन सपा के पीडीए प्रहरी अपनी लड़ाई को कयामत तक लड़ेंगे.

सपा अध्यक्ष ने फॉर्म-7 को लेकर साधा निशाना

अखिलेश यादव ने लिखा- ‘भाजपा का फ़र्ज़ीनामा और चुनाव आयोग की बंद कबूतरी आँख का विस्तारपूर्वक विवरण: फर्जी फ़ॉर्म-7 में जितने भी नाम दिखे वो सब PDA हैं. पिछड़े हैं, दलित हैं, अल्पसंख्यक-मुस्लिम हैं. नाम कटवाने के षड्यंत्र की सूची में-
कहीं कुर्मी, कहीं पटेल
कहीं पाल, कहीं मौर्य
कहीं लोध, कहीं लोधी
कहीं कुर्मी, कहीं यादव
कहीं पासी, कहीं पासवान
कहीं निषाद, कहीं मल्लाह
कहीं केवट, कहीं कश्यप
कहीं कुम्हार, कहीं प्रजापति
कहीं सोनकर, कहीं कोरी
कहीं अंसारी, कहीं भारती
कहीं पटेल, कहीं कनौजिया
कहीं बिंद, कहीं सैंथवार
कहीं भर, कहीं राजभर
कहीं कुंजरा, कहीं रयीन
कहीं गुर्जर, कहीं गडेरिया
कहीं गद्दी, कहीं घोसी
कहीं माली, कहीं सैनी
कहीं मणिहार, कहीं काचर
कहीं हज्जाम, कहीं सलमानी
कहीं तेली, कहीं समानी
कहीं रोगंगर, कहीं धोबी
कहीं लाखेर, कहीं गंगवार
कहीं बाथम, कहीं जाट,
कहीं कोई अन्य पीडीए…

ये सूची और भी लंबी हो सकती है, अगर चुनाव आयोग AI से निकलवाकर वो सूची दे दे, जो भाजपा ने उनको वोट काटने के लिए दी है या कहें भाजपा से उन्हें मिली है. सुनवाई के लिए 1-2 किमी के अंदर सुनवाई केंद्र बनाए जाएं और सुनवाई में अनसुनी न की जाए.

पंचायत चुनाव को आरक्षण के नाम पर फँसाकर भाजपा सरकार इसलिए टाल रही है कि क्योंकि वो जानती है कि गाँव-गाँव तक जनता उनके विरुद्ध वोट डालने के लिए तैयार बैठी है और भाजपा हज़ार घपले-घोटाले के बावजूद भी जीतने की स्थिति में नहीं है. ये सरकार न जनगणना कर रही है, न जाति गिन रही है. भाजपा पूरी तरह नाकाम सरकार है.

जिनके नाम काटने की कोशिश हो रही हैं, सबकी कहानी एक ही जगह जाकर जुड़ती है: जाति से. जिन्होंने कटवाए वो कौन हैं? वो सब भाजपा के वर्चस्ववादी, सामंतवादी, प्रभुत्ववादी लोग हैं या उनके संगी-साथी, जिनकी पीठ पर प्रशासन का हाथ है और हाथ में चुनाव आयोग की ढाल है. उन्हें पता है कि वो फर्जी फॉर्म-7 भरेंगे और चुनाव आयोग, प्रशासन कुछ नहीं करेगा. पर समाजवादी पार्टी अपनी लड़ाई लड़ेगी. जिला प्रशासन के पास भी जाएगी, और सुप्रीम कोर्ट तक भी.

PDA वाले क़यामत तक लड़ेंगे अपने  PDA के वोट के अधिकार की लड़ाई क्योंकि वोट छिना तो सब छिन जाएगा. पीडीए प्रहरी सावधान रहें और वोट कटनेवाले हर पीड़ित की सहायता करें. निगरानी बढ़ा दें और अपना नारा याद रखें: एक भी वोट न कटने पाए! एक भी वोट न घटने पाए!’


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