9 साल का स्पेशल बच्चा, कैसे मिलेगा ऐडमिशन?

 

नई दिल्ली: 9 साल के एक स्पेशल बच्चे के लिए ऐडमिशन बड़ा सवाल बन गया है। बच्चे के पैरंट्स का कहना है कि बुराड़ी के सर्वोदय बाल विद्यालय में उन्होंने बच्चे के ऐडमिशन के लिए बात की मगर स्कूल प्रिंसिपल का कहना है कि ऐडमिशन क्लास 1 में नहीं दिया जा सकता, ऐडमिशन मिलेगा तो क्लास 4 में ही। पैरंट्स का कहना है कि बच्चे ने चैरिटी स्कूल में केजी तक ही पढ़ा है, वह क्लास 4 के लायक नहीं है। बच्चा 50% मेंटली चैलेंज्ड है, जिसके लिए उसे इहबास से सर्टिफिकेट भी दिया गया है।

एजुकेशन एक्सपर्टस का कहना है कि बच्चे पर ऊपर की क्लास में ऐडमिशन लेने के लिए दवाब नहीं डाला जा सकता। स्कूल प्रिंसिपल से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई मगर उन्होंने बात नहीं की। हालांकि, शिक्षा निदेशालय के सीनियर अधिकारी का कहना है कि मामले को वह बुधवार को देखेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि बच्चे को डिसअबिलिटी ऐक्ट के हिसाब से सही क्लास में ऐडमिशन मिल सके।

इसी साल शिक्षा निदेशालय ने राइट ऑफ पर्सेंस विद डिसअबिलिटी ऐक्ट का हवाला देते हुए नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके हिसाब से नर्सरी के लिए 3 से 9 साल, केजी के लिए 4 से 9 साल और क्लास 1 के लिए 5 से 9 साल होगी मगर 9 साल के इस बच्चे के पैरंट्स उसकी शिक्षा और भविष्य के लिए परेशान घूम रहे हैं। बच्चे के पिता सिक्यॉरिटी गार्ड हैं। उनका कहना है कि 10 दिन पहले वह बच्चे के ऐडमिशन के लिए सर्वोदय बाल विद्यालय स्कूल गए थे क्योंकि वहां स्पेशल एजुकेटर हैं।

मां बताती हैं, हमने फर्स्ट क्लास में ऐडमिशन के लिए बात की मगर प्रिंसिपल ने कहा कहना है कि 9 साल का बच्चा क्लास 1 में नहीं लिया जा सकता। उनके कहने पर हम स्पेशल एजुकेटर से मिले मगर उन्होंने भी कहा कि स्पेशल बच्चे के लिए भी उम्र की लिमिट होती है। उन्हें कहा गया कि ऐडमिशन तीसरी या चौथी में भी तभी होगा, जब सीटें खाली हों। पैरंट्स का कहना है कि उनके पास अदालत जाने का ही आखिरी रास्ता है।

एजुकेशन ऐक्टिविस्ट अशोक अग्रवाल का कहना है कि स्कूल के हेड को यह जिम्मा दिया है कि वह देखें कि बच्चा किस क्लास के लिए फिट है। बच्चा 12 साल का भी तो उसे नर्सरी में भी ऐडमिशन दिया जा सकता है। सीधी बात यह है कि बच्चे को एजुकेशन सिस्टम में लाना है। डिसअबिलिटी ऐक्ट ऐसे बच्चों को 18 साल तक फ्री एजुकेशन की बात करता है। उम्र का नियम ही गलत है। ऐक्ट कहता है कि बच्चे की भलाई में जो किया जा सके, वह किया जाए। बच्चे की मां कहती हैं कि अगर ऐडमिशन नहीं मिलता है, तो हमारे पास उसे घर पर बैठाने के लिए अलावा कोई चारा नहीं है क्योंकि प्राइवेट स्कूल में वे ऐडमिशन नहीं करा सकते।

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