भाजपा में महिला कार्यकत्रियों की उपेक्षा, महिला आरक्षित सीटो पर नेताओ की पत्नियों को टिकट | 24CityNews


भाजपा में महिला कार्यकत्रियों की उपेक्षा, महिला आरक्षित सीटो पर नेताओ की पत्नियों को टिकट

 
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  • पार्टी की सक्रिय महिला कार्यकत्रियों में गुस्सा
  • कुछ ने पार्टी तो कुछ ने सक्रिय राजनीति को अलविदा कहने का बनाया मन

गाज़ियाबाद [दिग्विजय त्यागी]: भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार देर शाम निकाय पार्षद प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी. सूची देखकर कुछ लोगो के चेहरे लटके तो कुछ ने मिठाई बांटकर ख़ुशी मनाई.

सूची में सबसे चौकाने वाली बात यह रही कि महिला आरक्षित सीटो पर भाजपा की सक्रिय महिला कार्यकत्रियों के बजाये नेताओ की पत्नियों को टिकट दिया गया. जिससे पार्टी की सक्रिय महिला कार्यकत्रियां हतोत्साहित नजर आयी. टिकट वितरण में हुई इस धांधली से कुछ महिला कार्यकत्रियों ने पार्टी को तो कुछ ने सक्रिय राजनीति को ही अलविदा कहने का मन बना लिया है.

कुछ वार्डो में तो भाजपा की महिला कार्यकत्रियों ने पार्टी को महिला विरोधी तक करार दे दिया. फ़ोन पर अपनी व्यथा जाहिर करते हुए कहा कि यदि पार्टी में नेताओ की पत्नियों को ही टिकट देना है तो महिला कार्यकत्रियां पार्टी में अपना समय खराब क्यों करे?

कहा भाजपा ने सक्रिय महिला कार्यकत्रियों की उपेक्षा कर ऐसी महिलाओ को टिकट दिया जो आज तक कभी घर से बाहर तक नहीं निकली. यह निश्चित रूप से सक्रिय महिला कार्यकत्रियों का उत्पीडन है. एक महिला कार्यकत्री ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा मैंने पार्टी को निस्वार्थ रूप से अपने जीवन के 15 वर्ष दिए. पार्टी के हर कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई. लोगो के हाथ पकड़-पकड़ कर घर से निकालकर पार्टी के लिए मतदान कराया, फिर भी पार्टी से कभी कुछ नहीं माँगा. इस बार महिला सीट आरक्षित होने पर टिकट माँगा था. पार्टी ने मेरी जगह एक नेता की पत्नी को टिकट दे दिया, जिसका नाम भी क्षेत्रवासी पहली बार सुनेगे. यदि पार्टी में महिला कार्यकत्रियो को अपमानित ही होना है तो फिर बेहतर है पार्टी को अलविदा कह दिया जाए.

एक महिला कार्यकत्री तो इतने गुस्से में थी कि पार्टी की नीतियों पर ही सवाल खड़े कर दिए, बोली क्या पुरुष कार्यकर्ता की पत्नियों को टिकट देना महिला सशक्तिकरण है? भाजपा केवल महिला सशक्तिकरण का ढोल पीटती है, असल में पार्टी महिलाओ का उत्पीडन कर रही है.

पार्टी वितरण में धनबल व सेटिंग का प्रयोग हुआ. जिसका पैसा बड़े नेताओ तक पंहुचा उसे ही टिकट मिला. कार्यकर्ताओ की प्रतिबद्धता कोई मायने नहीं रखती. पहले बसपा में टिकट बेचे जाते थे, अब तो भाजपा में कमल को नीलाम करने का खुला खेल खेला जा रहा है. यही हाल रहा तो आने वाले 10 वर्षो में पार्टी का नाम लेने वाला कोई नहीं होगा. कांग्रेस ने तो देश पर 60 वर्ष राज किया लेकिन भाजपा आने वाले दस वर्षो में ही ख़त्म हो जायेगी.

 

 
 
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