उत्तर प्रदेश: BJP कार्यकर्ताओ की छोडिये मंत्रियों तक की नहीं सुन रहे अधिकारी | 24CityNews


उत्तर प्रदेश: BJP कार्यकर्ताओ की छोडिये मंत्रियों तक की नहीं सुन रहे अधिकारी

 

लखनऊ/नॉएडा [दिग्विजय]: सूबे में सरकार बदले लगभग सात माह हो गए है, लेकिन धरातल पर कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा है। सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार जैसे अखिलेश सरकार में चल रहा था वैसे ही बादस्तूर जारी है। भाजपा कार्यकर्ता तो अपने आप को तभी ठगा महसूस करने लगे थे जब सरकार के मंत्रियों के बयानों में कार्यकर्ताओ को थानों, कचहरी से दूर रहने की नसीहत दी जाने लगी थी।

अब तो भाजपा के विधायक, सांसद और मंत्री तक ब्यूरोक्रेसी और दूसरे प्रशासनिक अधिकारीयों से परेशान है क्योंकि अधिकारी अब इनकी भी नहीं सुन रहे है।

कोई अधिकारी मंत्री को यह कहे कि “जाइये आप मेरा ट्रान्सफर करा दीजिये, मैं आपकी बात नहीं मानूंगा” वो भी तब जब बेचारे मंत्री जी सही काम करने की बात अधिकारी से कह रहे हो। तो अनायास ही समझा जा सकता है प्रदेश में क्या स्थिति है?

स्थिति यह है कि पहले पार्टी के विधायक थानों के बाहर धरने पर बैठे और अब ब्यूरोक्रेसी से परेशान भाजपा सांसद इसके खिलाफ तिरंगा यात्रा निकालने को मजबूर हैं। बुधवार को सांसद कौशल किशोर ने मलिहाबाद से तिरंगा यात्रा की शुरूआत करते हुए आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बाद भी ब्यूरोक्रेसी और दूसरे प्रशासनिक अधिकारी भ्रष्टाचार से बाज नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि तहसील और थानों में बिना रिश्वत लिए कोई काम नहीं हो रहा।

सूबे में अपनी सरकार होते हुए भी भाजपा सांसद की भ्रष्टाचार के खिलाफ तिरंगा यात्रा निकालना, ब्यूरोक्रेसी पर योगी सरकार की कमजोर पकड़ को दर्शाता है। सरकार बदलने के बाद प्रारम्भिक एक माह में लगा था मानो उत्तर प्रदेश बदलाव की राह पर चल पड़ा है लेकिन छ: माह व्यतीत होने के बाद बदलाव कही दूर दूर तक नजर नहीं आ रहा। सरकारी अधिकारी व कर्मचारी सरकार पर हावी है।

क्यों हुई ऐसी स्थिति?
योगी सरकार बनने के बाद सरकारी कर्मचारियों व अधिकारीयों में सरकार का भय अवश्य दिखाई दिया था। इस भय को बनाए रखने के लिए जरुरी था कि बेईमान अधिकारीयों को जिम्मेदारी से हटा कर ईमानदार अधिकारीयों को आगे किया जाता। लेकिन योगी सरकार केंद्र सरकार के दबाव में ऐसा फैसला करने में नाकाम रही। योगी सरकार को केंद्र सरकार से स्पेशल इंस्ट्रक्शन यह मिला था कि अधिकारियों के तबादले नहीं किये जाए उन्हें सुधरने का अवसर दिया जाए। यही इंस्ट्रक्शन योगी सरकार के गले की फ़ांस बन गया। देर से ट्रान्सफर किये गए तो पैसे के बल पर कुछ बेईमान अधिकारी अच्छे स्थानों पर पोस्टिंग कराने में कामयाब रहे।

देर से किये फैसले!
सरकार बनने के बाद सहारनपुर में अम्बेडकर यात्रा निकालने को लेकर हुए बवाल के बाद प्रशासन की नाकामी होते हुए भी योगी सरकार ने जिले के डीएम व एसएसपी का ट्रान्सफर करने में बहुत अधिक समय लगा दिया, और जब ट्रान्सफर किया भी तो दोनों को बेहतर जगह भेजा गया। एसएसपी को नॉएडा में पोस्टिंग दी गयी तो जिलाधिकारी का प्रमोशन कर सचिवालय भेजा गया। वो भी तब जब इस मामले में भाजपा सांसद की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी और दोनों अधिकारी भाजपा कार्यकर्ताओ का जबरदस्त शोषण कर रहे थे। जिसके परिणामस्वरूप ब्यूरोक्रेसी में गलत सन्देश गया और सरकार का भय समाप्त हुआ।

सरकार व प्रशासन के बीच की कड़ी समाप्त की
किसी भी पार्टी की सरकार हो उस पार्टी का कार्यकर्ता सरकार व प्रशासन के बीच की कड़ी होता है। वह सरकार तक प्रशासन द्वारा किये जा रहे अच्छे व बुरे सभी कार्यो को पंहुचता है। कुछ अपवाद छोड़ दिया जाय तो कार्यकर्ता स्थानीय प्रशासन पर सरकार की बेहतर छवि बनाने के लिए दबाव बनाता है। लेकिन भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओ को थाने कचहरी से दूर रहने की नसीहत दी। जिससे सरकार व प्रशासन के बीच की एक महत्वपूर्ण कड़ी स्वत: ही समाप्त हो गयी। निगरानी नहीं होते देख अधिकारीयों व कर्मचारियों पर बना दबाव समाप्त हो गया।

 

 
 
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