नवरात्र विशेष: नवदुर्गा-पूजा के सांतवे दिन मॉ काल रात्रि की उपासना का विधान है | 24CityNews


नवरात्र विशेष: नवदुर्गा-पूजा के सांतवे दिन मॉ काल रात्रि की उपासना का विधान है

 
  • मॉ कालरात्रि अपने भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान करने वाली हैं

देवबंद (खिलेन्द्र गांधी): नवरात्र के सातंवे दिन दुर्गा के सातंवे स्वरूप मॉ कालरात्रि की पूजा अर्चना भक्तों द्वारा की जाती है।
नवरात्र के सातवें दिन मॉ दुर्गा के सांतवे स्वरूप को कालरात्रि कहा जाता है, दुर्गा-पूजा के सांतवे दिन मॉ काल रात्रि की उपासना का विधान है मॉ कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, इनका वर्ण अंधकार की भांति काला है, केश बिखरे हुऐ है, कंठ में बिजली की चमक वाली माला है, मॉ कालरात्रि के तीन नेत्र ब्रहमाण्ड की तरह विशाल व गोल है, जिनमे से बिजली की किरणें निकलती रहती है इनकी नासिका से स्वास तथा निःस्वास से अग्नि की भंयकर ज्वालाऐं निकलती रहती है, मॉ का यह भय उत्पन्न करने वाला स्वरूप, केवल पापियों का नाश करने के लिये है।

श्री त्रिपुर मॉ बाला सुन्दरी देवी मन्दिर के पुजारी शिवम शर्मा ने बताया कि मॉ कालरात्रि अपने भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान करने वाली हैं इस कारण इन्हे शुंभकरी भी कहा गया है। दुर्गा पूजा के सप्तम दिन साधक मन ‘सहसार’ चक्र में अवस्थित होता है। मॉ कालरात्रि के इस मंत्र ‘‘कालरात्रि मर्हारात्रि मोहरात्रिश्च दारूणां, त्वं श्री स्त्वमीश्वरी त्वं हीस्त्वं बुद्धिर्बोधलक्षणा” का जाप करने से साधक पर मॉ की कृपा होती है।

उन्होने बताया कि मधु कैटब नामक महाप्राक्रमी असुर से जीवन की रक्षा हेतू भगवान विष्णू को निंद्रा से जगाने के लिये ब्रहमा जी ने इसी मंत्र से मॉ की स्तूति की थी, यह देवी काल रात्रि ही महामाया है और भगवान विष्णू की योग निद्रा है, इन्होने ही सृष्टि को एक दुसरे से जोड रखा है।

देवी कालरात्रि का वर्ण काजल के समान काले रंग का है जो अमावस की रात्रि से भी अधिक काला है, मॉ कालरात्रि के तीन बडे बडे उभरे हुऐ नेत्र है जिनमे मॉ अपने भक्तों पर अनुकम्पा की दृष्टि रखती है, देवी की चार भुजाऐं है दायी भुजा की उपंरी भुजा में महामाया भक्तों को वरदान दे रही है और नीचे भुजा से अभय का आर्शिवाद प्रदान करती है। बायी भुजा में क्रमशः तलवार, खडग धारण किया है, देवी कालरात्रि के बाल खुले हुऐ है और हवाओं में लहरा रहे है, देवी काल रात्रि गर्दभ पर सवार है मॉ का वर्ण काला होने पर भी कांतिमय और अदभुत दिखाई देता है।

उन्होने बताया कि देवी कालरात्रि का यह विचित्र स्वरूप भक्तों के लिये अत्यंत शुभ है।

 
 
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