हाईवे पर राम भरोसे है सफर, सुविधाओं का भारी टोटा | 24CityNews


हाईवे पर राम भरोसे है सफर, सुविधाओं का भारी टोटा

 

-बाईपास पर कई जगहों पर ढहने लगी जमीन, कभी हो सकता बाईपास पर बडा हादसा

मुजफ्फरनगर। खतौली क्षेत्र के गांव भंगेला से लेकर नावला कोठी तक नौ किलो मीटर के दायरे में बने बाईपास हाईवे पर यात्रा करना रामभरोसे है। सुविधाओं का भारी टोटा होने से मुसाफिरों को खतरा बना हुआ है। लेकिन टोल प्लाजा पर सुविधा शुल्क वसूल करने के बाद भी बाईपास विकास कार्य न होने के कारण यात्रियों की जान का खतरा बना हुआ है। मगर हाईवे की व्यवस्थाओं पर काई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अनेक स्थानों पर रेलिंग टूटी पड़ी और जगह जगह हाईवे की जमीन ढहने लगी है। जिससे कभी भी बाईपा जमींनोदर्ज हो सकता है। शासन प्रशासन की इस अनदखी से कही भविष्य में बडा हादसा हो सकता है। खूनी हो चुके बाईपास हाईवे पर रफ्तार से ज्यादा असुविधाएं सितम ढाह रही हैं। लगातार दुर्घटना होने का सिलसिला जारी है। मगर शासन-प्रशासन आंखे मूंद कर सब कुछ देख रहा है। चिकने और सपाट बने हाईवे बाईपास पर अनेक स्थानों  टूटी रेलिंगों से वाहन टकरा कर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे है तो कहीं रेलिंग ना होने से खाई में गिर रहे हैं। एनएचआईए की अनदेखी के कारण रोजाना एक ना एक अभागी जिंदगी को हाईवे लील रहा है। और लोग अकाल ही मौत के मुंह में जा रहे है। बात करे सुविधाओं की तो कहने और बताने की गुजांइश नहीं है। पूरे हाईवे का भ्रमण किया जाए तो चैकाने वाले तथ्य खुद बे खुद सामने आ जायेगे। सुरक्षित सफर का दावा करने वाले एनएच आईवे टोल प्लाजा पर यात्रियों से वसुली के नाम  यात्रियों की जेबों पर डाका डालने के अवाला कुछ नहीं है। सुविधाओं को ग्रहण लगा पड़ा है। कहीं रेलिंग वाहनों से टकरा कर उखड़ चुकी है तो कहीं राष्ट्रीय राज मार्ग की जमीन ढहने लगी है। यही नही बरसात के मोसम में हाईवें पर जगह जगह जमीन ढहने से गहरी खाई बन गयी है। जो कभी भी किसी बडे हादसे की गवाह बन सकती है। ऐसे में यात्रियों के सुरक्षित घर पहुंचने की जिम्मेदारी किसको दी जा सकती है, जहां सफर राम का नाम और हनुमान चालीसा पढ़ने से पूरा होता हो।

शासन को रिर्पोट सोपने के बाद भी आज भी अधूरा है बाईपास का निर्माण कार्य

तीन साल बीतने के बाद भी हाईवे पर पूर्ण सुविधाओं से लेस नहीं हो सका है। अनेक स्थानों पर संकेतिक निशान, अवरोधक तथा सर्विस रोड भी अधूरी होने के साथ विभिन्न खाई वाले स्थानों से रेलिंग उधड़ चुकी है। जबकि सर्वेक्षण कर दिल्ली की एक प्राईवेट कंपनी ने भंगेला चैहारे को फेल करार दिया है। विगत सालों पूर्व कंपनी ने एनएचआईए और शासन को सौंपी रिपोर्ट में बताया कि भंगेला चैहारा दुर्घटनाओं का गढ़ है, जहां पर पूर्ण निर्माण नहीं है। साथ ही वहां लाइटों का क्रम, कट आदि नियमित नहीं है। जिससे हादसे होने की संभावना अधिक है। विगत सालों पूर्व एनएचआईए के पीडी एसके मिश्रा, पूर्व एडीएम मुजफ्फरनगर राजेश कुमार श्रीवास्तव, पूर्व एसडीएम खतौली नरेंद्र सिंह को साथ लेकर टीम ने हाईवे के अधूरे निर्माण कार्यो का गहनता से जायजा लिया था। टीम को विभिन्न स्थानों पर निर्माण कार्य क्षतिग्रस्त मिला था, जबकि कई जगहों से हाईवे टूटा होने के साथ अपूर्ण पाया गया। जिसकी अधिकारियों ने शासन को रिपोर्ट बनाकर कार्रवाई होने की बात कही थी। लेकिन उसके बाद भी आज तक बाईपास पर की असुविधाओं को पूरा नही किया गया है। शासन और सम्बंधित विभाग की यह अनदेखी कभी भी बाईपास पर कोई बडा हादसा करा सकाती है।

 
 
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