प्रशासन के खिलाफ प्रधानों ने खोला मोर्चा, बेमियादी धरना | 24CityNews


प्रशासन के खिलाफ प्रधानों ने खोला मोर्चा, बेमियादी धरना

 

– शौचालय निर्माण में एफआईआर और जांच को बताया उत्पीड़न,

– सोहजनी जाटान प्रकरण में दर्ज एफआईआर निरस्त करने की मांग

मुजफ्फरनगर। केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन के तहत शत प्रतिशत ग्रामों को इस साल के अंत तक खुले में शौच मुक्त ओडीएफ करने के मामले में अनियमितता सामने आने पर ग्राम प्रधानों के खिलाफ की जा रही कार्यवाही को लेकर जिले के प्रधानों ने प्रशासन के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को जिले के प्रधानों ने अखिल भारतीय प्रधान संगठन के आह्नान पर कलेक्ट्रेट पहुंचकर बेमियादी आंदोलन शुरू कर दिया। इस बेमियादी धरने की अध्यक्षता साल्हाखेडी के प्रधान सुरेंद्र ंिसह और संचालन दानिश प्रधान पावटी व प्रमोद प्रधान सठेडी ने संयुक्त रूप से किया। धरने के दौरान प्रधानों ने जिला प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाये। उन्होंने शौचालय निर्माण के लिए चयनित पात्र परिवारों में तथाकथित अनियमितता के आरोप में ग्राम पंचायत सोहजनी जाटान के प्रधान सुनील कुमार और सचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज किये जाने के निर्णय का कड़ा विरोध कर निंदा की। प्रधानों ने कहा कि ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण में पात्रों के चयन और लाभार्थियों के फार्म भरवाने का कार्य जनपद स्तर से चयितन व प्रशिक्षित सीएलटीएस टीम के द्वारा किया गया है। इसमें प्रधान या सचिव के केवल शपथपत्र भरकर फार्मांे पर हस्ताक्षर करवाये गये हैं। इस कारण अपात्रों के चयन की कोई जिम्मेदारी प्रधान सचिव नहीं बनती है। प्रधानों ने उच्चाधिकारियों पर मानसिक शोषण करने का आरोप लगाते हुए कहा किसी भी कार्य को कम समय में करने का दबाव बनाया जाता है और फिर जांच के नाम पर उत्पीड़न शुरू कर दिया जाता है। गांवों को ओडीएफ करने के लिए अधिकारी पहले किसी भी स्तर पर कार्य करने को मजबूर करते रहे और अब अनियमितता बताकर प्रधानों को निशाना बनाया जा रहा है। संगठन ने सोहजनी जाटान प्रकरण में दर्ज एफआईआर निरस्त करने की मांग की। शौचालय निर्माण की सम्पूर्ण जिम्मेदारी सीएलटीएस को देने पर भी जोर दिया। प्रधानों ने प्रशासन पर आरोप लगाये कि ग्रामों में ठप पड़े विकास कार्यों को शुरू कराने के लिए कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। करीब एक साल से ग्रामों के लिए निर्माण सामग्री के रेट रिवाइज नहीं किये गये हैं। कई बार मांग के बावजूद भी सकारात्मक नजरिया नहीं दिखाया गया। निर्माण कार्य में प्रयुक्त सामग्री का मूल्य बाजार भाव पर तय किया जाना आवश्यक है। इसके साथ ही प्रधानों ने सौर ऊर्जा के तहत ग्रामों में लगायी जा रही स्ट्रीट लाइटों की जांच पर भी सवाल उठाते हुए प्रशासन को निशाना बनाया। प्रधानों का कहना है कि कुटेशन पर न्यूनतम दर पर लाइटें लगवायी गयी हैं। इसी जांच अनुचित है। प्रधानों के खिलाफ शिकायत पर जांच को गलत बताते हुए कहा कि शिकायतकर्ता से शपथपत्र लेकर जांच हो, यदि झूठी शिकायत मिले तो कानूनी कार्यवाही की जाये। धरने पर प्रधानों ने पीएम आवास योजना में लाभार्थी के चयन का अधिकार प्रधान या सचिव को देने, राशन कार्डों की पात्रता का चयन शीघ्र कराने, मनरेगा के कार्यों का पैसा खातों में शीघ्र भिजवाने की मांग की।

प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष सतेंद्र बालियान बरवाला ने कहा कि यदि उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे। मुख्य रूप से जगपाल गुर्जर बरूकी, सतेंद्र कुमार प्रधान खांजापुर, नवीन राठी भूराहेडी, देवंद्र कुमार जागाहेडी, नरपत तेजलहेडा, बिल्लू धनसेनी, देवेंद्र किनौनी, धर्मपाल गोयला, बबलू मिंडकली, रवि प्रधान, शहजाद मोरना, विदुर मोहन सहित सैंकड़ों प्रधान शामिल रहे।

लेखपाल संघ ने दिया प्रधानों को समर्थन

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष तेजवीर सिंह चैहान ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानों के बेमियादी आंदोलन को अपने संगठन का पूर्ण समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि बिना जांच पड़ताल के प्रधानों या सचिवों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना गलत है। जिस कार्य के लिए प्रधानों की कोई भूमिका नहीं है, उसमें वो दोषी कैसे हो सकते हैं। इसे अन्याय बताते हुए उन्होंने विश्वास दिलाया कि इस लड़ाई में लेखपाल प्रधानों के साथ खड़े हैं। भाजपा नेता नितिन मलिक ने भी धरने पर पहुंचकर प्रधानों की समस्या को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन देते हुए कहा कि प्रशासन को दोषियों पर कार्यवाही करनी चाहिए। इसके अलावा ग्राम विकास अधिकारी संघ व ग्राम पंचायत अधिकारी संघ ने भी इस आंदोलन में अपना समर्थन देकर मोर्चा खोल दिया है।

 
 
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